
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। यहां इलाका यानी क्षेत्र बंटवारे और बधाई वसूली को लेकर किन्नरों के दो गुट आपस में भिड़ गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसके बाद यह हाई-वोल्टेज ड्रामा कोतवाली थाने तक जा पहुँचा।
थाने के भीतर और बाहर कई घंटों तक भारी हंगामा चलता रहा। अंततः वरिष्ठ किन्नरों की मध्यस्थता और समझाइश के बाद दोनों पक्षों में आपसी सहमति बनी और मामला शांत हुआ। मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह क्षेत्र का निर्धारण और बाहरी किन्नरों का हस्तक्षेप है।
रीवा शहर के वार्ड क्रमांक 29, तरहटी इलाके में रहने वाले स्थानीय किन्नरों ने आरोप लगाया कि बाहर से आए कुछ किन्नर उनके तय क्षेत्र में घुसकर बधाई और नेग की वसूली कर रहे हैं।
स्थानीय गुट का कहना है कि हर क्षेत्र के किन्नरों का इलाका पहले से तय होता है, लेकिन बाहरी गुट नियमों का उल्लंघन कर उनके क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहा है। इसी बात को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों गुटों के बीच सड़क पर ही जमकर मारपीट और गाली-गलौज शुरू हो गई। सड़क पर हुई मारपीट के बाद दोनों गुट शिकायत दर्ज कराने सिटी कोतवाली थाने पहुंचे।
किन्नरों के थाने पहुंचते ही वहां का माहौल गरमा गया। थाने के परिसर में ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और हंगामा शुरू कर दिया। किन्नरों के उग्र रूप और हंगामे को देखकर पुलिस प्रशासन भी सख्ते में आ गया।
कोतवाली पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराने का काफी प्रयास किया, लेकिन काफी देर तक पुलिस की कोशिशें नाकाम रहीं। थाने में घंटों तक घमासान की स्थिति निर्मित रही और तमाशबीनों की भारी भीड़ जमा हो गई।
बता दे की यह कोई पहला मौका नहीं है जब रीवा में किन्नरों के बीच वर्चस्व और इलाके को लेकर जंग हुई हो। इससे पहले भी शहर में इस तरह की स्थितियां निर्मित हो चुकी हैं। नेग और बधाई राशि वसूलने के अधिकार को लेकर अक्सर विवाद की खबरें आती रही हैं।
फिलहाल थाने में बढ़ते बवाल को देखते हुए दोनों गुटों के वरिष्ठ और बुजुर्ग किन्नर भी मौके पर पहुंचे। वरिष्ठ किन्नरों ने दोनों पक्षों को अलग बैठाकर लंबी चर्चा की। उन्होंने परंपराओं और पुराने नियमों का हवाला देते हुए दोनों गुटों को समझाइश दी।
वरिष्ठों के हस्तक्षेप और समझौते के फॉर्मूले के बाद आखिरकार दोनों पक्ष शांत हुए और उनके बीच आपसी सहमति बन सकी। सहमति बनने के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।
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