
Sagar News: सागर (नवदुनिया प्रतिनिधि) सागर जिले के पथरिया जाट गांव की अभिलाषा जाट ने नारी शक्ति की मिसाल कायम की है। 25 साल पहले गांव में हुए एक झगड़े में उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। ऐसे में अभिलाषा ने न केवल अपने भाई-बहनों को पढ़ाया लिखाया, बल्कि स्वयं ने भी पुलिस में नौकरी हासिल की। 25 साल तक उसने कानूनी लड़ाई लड़ी और अपने पिता के हमलावरों को सात-सात साल की सजा दिलाई। अभिलाषा का कहना है कि जब वह आठ साल की थी अौर गांव के ही सरकारी स्कूल में तीसरी क्लास में पढ़ती थी। तभी 28 सितंबर 1997 की शाम स्कूल से लौटकर घर पहुंची तो देखा कि घर पर कोई नहीं है। अास-पड़ोस से पता चला कि मेरे पिता मुरारी लाल जाट का झगड़ा हो गया है। स्कूल ड्रेस पहने ही मैं दौड़कर सीधे खेत पहुंची अौर वहां मां को सारी बात बताई। फिर बाद में पता चला कि मेरे पिता मुरारी लाल जाट को गांव के कुछ लोगों ने जंगल में अकेला घेरकर बहुत बुरी तरह से पीटा है। उन्हें काफी चोटें अाई हैं अौर मेरे बड़े पिताजी राधेश्याम जाट अस्पताल लेकर गए हैं। कुछ दिन बाद जब मैंने पिता मुरारी लाल जाट को अस्पताल में देखा तो उनके पूरे शरीर पर पट्टी बंधी थी। सिर्फ उनका चेहरा दिख रहा था। वे अस्पताल में दर्द से तड़प रहे थे। उन्हें देखकर मैंने ठान लिया था कि पिता के साथ मारपीट करने वालों सजा जरूर दिलाऊंगी। उन्होंने बताया कि इस झगड़े के बाद उनके पिता चलने-फिरने में लाचार हो गए। 24 अगस्त 2012 को उनकी मौत हो गई। अभिलाषा ने बताया कि उन्होंने अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस फोर्स ज्वाइन की। 25 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने लड़ी। हाई कोर्ट ने झगड़े के 25 साल बाद तीन अारोपितों पवन उर्फ मुन्ना सिंह, जोगिंद्र उर्फ लाली सिंह अौर विक्रम सिंह जाट को हाल ही में सात-सात साल की सजा सुनाई है। अभिलाषा का कहना है कि उनके पिता मुरारी लाल 28 सितम्बर 1997 की शाम करीब चार बजे अारटीअो कार्यालय के पास स्थित पहाड़ी से चारा काटकर लौट रहे थे। तभी पुरानी रंजिश के चलते पहले से घात लगाकर बैठे करीब दर्जन भर अारोपितों ने उन पर लाठी, फरसा अौर बंदूक से हमला कर दिया। वे बुरी तरह घायल हो गए अौर वहीं नीचे गिर गए। चिल्लाने की अावाज सुनकर अासपास के लोग मौके पर पहुंचे अौर फिर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। तब से अारोपितों के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई अब उन्हें सजा दिलाने के साथ खत्म हुई है।
अकेली दम पर गाय-भैंस पालकर भाई-बहनों को पढ़ाया
आरक्षक अभिलाषा जाट का कहना है कि हमले में पिता के सिर की हड्डी में गहरी चोट के तीन घाव व फ्रैक्चर, दाहिने हाथ की ह्यूमरस हड्डी के निचले तीसरे भाग पर फैक्चर, बाएं हाथ के अग्रभाग की हड्डी में फ्रैक्चर और बाएं हाथ के पांचवें मेटाकार्पल में फ्रैक्चर पर फ्रैक्चर था। इससे वे चलने-फिरने में असहाय हो गए थे। घर में मां, हम तीनें बहनें अौर एक भाई है। कमाने वाला घर में कोई नहीं था। तब मैंने सारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर ली। घर में दो-तीन भैंसे व गाय थी जिनका दूध बेचकर हम लोग घर चलाते और पिता को थोड़ी बहुत दवाईयां लाते। वर्ष 2012 में नौकरी लगने पर थोड़ी स्थिति संभली, लेकिन एक साल बाद पिता की मौत हो गई। पिता के जाने के बाद अभिलाषा ने घर की पूरी जिम्मेदारी संभाली और छोटे भाई-बहनों को पढ़ाया घर का खर्च चलाया। घर में सबसे बड़ी होने के कारण अभिलाषा ने स्वयं की शादी की और एक छोटी बहन की शादी की। भाई अनुभव को अब प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करा रही हैं। अभिलाषा के बड़े पिता राधेश्याम का कहना है कि उनके छोटे भाई मुरारी लाल पर हमले के वक्त उनके सभी तीन बेटी और बेटा बहुत छोटे-छोटे थे। किसी ने उनकी मदद नहीं की। मुरारी लाल के पास तीन एकड़ 80 डिसमिल जमीन थी। इस जमीन पर बच्चे खेती करते तो गांव के कुछ लोग जमीन हड़पने की मंशा से खेतों में पानी बहाकर फसलें बर्बाद कर देते और फिर दवाब बनाकर वह जमीन भी हड़प ली। अभिलाषा ने अकेले ही पूरा परिवार संभाला और संघर्ष कर स्वयं एक अच्छे मुकाम पर पहुंची। वह वर्तमान में सागर के केंट थाने में पदस्थ है।