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सागर में जहरीली शराब ने 10 लोगों की छीनी आंखों की रोशनी, 100 से ज्यादा पीड़ितों में दिखे धुंधलापन के लक्षण

Sagar Poisonous Liquor Tragedy: जहरीली शराब पीने वाले 34 लोगों की मौत का ब्यौरा सामने आ चुका है। शराब का यह जहर जीवित बचे लोगों का जीवन भी दूभर करने व...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 08:20:09 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 08:20:09 PM (IST)
सागर में जहरीली शराब ने 10 लोगों की छीनी आंखों की रोशनी, 100 से ज्यादा पीड़ितों में दिखे धुंधलापन के लक्षण
सागर शराब कांड का दर्दनाक पहलू। (सांकेतकि तस्वीर)

HighLights

  1. सागर शराब कांड का दर्दनाक पहलू
  2. 7 दिन बाद भी आंखों में पसरा अंधेरा
  3. पीड़ितों में दिख हैं धुंधलापन के लक्षण

पृथ्वी सुरेंद्र सिंह, नईदुनिया, सागर। जहरीली शराब पीने वाले 34 लोगों की मौत का ब्यौरा सामने आ चुका है। शराब का यह जहर जीवित बचे लोगों का जीवन भी दूभर करने वाला है। इस जहर ने बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के 10 से अधिक लोगों से उनकी आंखों की रोशनी छीन ली है। इनमें से चार लोग ऐसे हैं, जिनकी आंखों की नसों को इतना नुकसान हुआ है कि उन पर हमेशा के लिए अंधे होने का खतरा मंडरा रहा है।

करीब 95 प्रतिशत मरीजों को धुंधला दिख रहा

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने इनमें से दो को बेहतर इलाज के लिए भोपाल एम्स रेफर किया है। सामने आया है कि चार-पांच सितंबर को जहरीली शराब पीने वाले 100 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) पहुंचे थे। इनमें करीब 95 प्रतिशत मरीजों को धुंधला दिख रहा था। जांच के बाद इनका इलाज शुरू हुआ। कई लोगों की जान चली गई।


कुछ की हालत सुधरी और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। लेकिन अस्पताल के वार्डों में कई लोग ऐसे हैं, जिनके लिए हर गुजरता दिन रोशनी की उम्मीद और अंधेरे के डर के बीच बीत रहा है।

अचानक जा रही है आंखों की रोशनी

मोहली निवासी गोविंद अहिरवार ने बताया कि उसने सागर गोल्ड शराब पी थी। इसके बाद उल्टियां और पेट दर्द शुरू हो गया। कुछ ही घंटों बाद उसे दिखना बंद हो गया। घटना को सात दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब भी उसे दोनों आंखों से दिखाई नहीं दे रहा है।

रावरा निवासी सुनील विश्वकर्मा रीवा में जल निगम में कर्मचारी हैं। छुट्टी पर घर आए थे। दोस्तों के कहने पर शराब पी और इसके बाद अचानक दिखाई देना बंद हो गया। सुनील बताते हैं कि अब एक आंख से दिखने लगा है, लेकिन दूसरी आंख से भी धुंधला दिख रहा है।

90 फीसदी से ज्यादा अंधत्व

बीएमसी में भर्ती संतोष लोधी और गोविंद रजक को आंखों की रोशनी में गंभीर कमी के चलते भोपाल रेफर किया गया है। दोनों में 90 प्रतिशत से ज्यादा ब्लाइंडनेस बताया गया है। बीएमसी में उपचार के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होने पर उन्हें एम्स भोपाल भेजा गया। वहीं दो अन्य मरीजों को भी रेफर करने की तैयारियां चल रही हैं।

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यह मिथाइल अल्कोहल का असर

बीएमसी के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि इन लोगों ने जो शराब पी थी उसमें मिथाइल अल्कोहल था। उसके कारण आंखों की ऑप्टिक नर्व में सूजन आ जाती है। इसी कारण मरीजों को देखने में परेशानी होती है।

मिथाइल एल्कोहल शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित करता है। जिन मरीजों के आंतरिक अंग पहले से कमजोर थे, उनमें इसका असर अधिक गंभीर दिखाई दिया। वहीं कुछ मरीजों में इसके कारण आप्टिक नर्व डैमेज हुई और उन्हें टाक्सिक इंड्यूस्ड आप्टिक न्यूराइटिस की स्थिति का सामना करना पड़ा। इस स्थिति में आंखों की रोशनी प्रभावित हो जाती है। हालांकि यह स्थिति को उपचार के बाद सुधर सकती है। यही वजह है कि कुछ मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आई है। - डॉ. राजेश जैन, अधीक्षक, बीएमसी