धोखाधड़ी से नौकरी पाने वाले आरक्षक को कोर्ट ने सुनाई 2 साल कैद की सजा, ऐसे पकड़ में आया था
प्रशिक्षण के दौरान उसके हिंदी विषय न पढ़े जाने पर चयन प्रक्रिया संदिग्ध पाई गई। इस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटनी द्वारा जांच कराई गई। जांच के दौरान ओ ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 06 Jan 2026 09:45:25 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Jan 2026 09:53:32 PM (IST)
फर्जी आरक्षक को मिली सजा।सतना। धोखाधड़ी कर आरक्षक की नौकरी प्राप्त करने के मामले में जिला न्यायालय सतना से कड़ा संदेश देने वाला फैसला सामने आया है। माननीय प्रथम अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार मिश्रा ने आरोपी टिंकू कुमार यादव पिता अरविंद प्रसाद यादव उम्र 34 वर्ष, निवासी ग्राम बरौंधा शंभूगंज, जिला बांका (बिहार) को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके अतिरिक्त मप्र मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 के अंतर्गत एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है।
मामले में शासन की ओर से अभियोजन अधिकारी चंद्र प्रकाश मिश्रा ने पैरवी की। अभियोजन प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि आरोपी वर्ष 2013 की आरक्षक संवर्ग भर्ती परीक्षा में चयनित हुआ था। प्रशिक्षण के दौरान उसके हिंदी विषय न पढ़े जाने पर चयन प्रक्रिया संदिग्ध पाई गई।
इस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटनी द्वारा जांच कराई गई। जांच के दौरान ओएमआर उत्तर शीट, उपस्थिति पत्रक, प्रश्न पत्र का मुख्य पृष्ठ एवं उत्तर पुस्तिका जब्त की गई। साथ ही आरोपी के दाएं-बाएं हाथ के अंगूठे के निशान लिए गए।
विवादित अंगूठा निशान की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि ओएमआर शीट पर लगे अंगूठे के निशान आरोपी के नहीं थे। इसके आधार पर थाना माधवनगर में अपराध पंजीबद्ध किया गया।
बाद में थाना कोलगवां में अपराध क्रमांक 318/17 के तहत धारा 419 एवं 420 भादवि में प्रकरण दर्ज किया गया। साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए दंडादेश पारित किया।