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सागौन के बाद खैर पर तस्करों की नजर, सतना के जंगलों से यूपी-हरियाणा तक लकड़ी का नेटवर्क

कार्रवाई के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि जंगल में खैर के पेड़ कटवा कौन रहा है और लकड़ी का असली खरीदार या नेटवर्क कौन है। सिंहपुर और बरौंधा में शिकायतों...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 05:26:51 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 05:26:51 PM (IST)
सागौन के बाद खैर पर तस्करों की नजर, सतना के जंगलों से यूपी-हरियाणा तक लकड़ी का नेटवर्क
विभाग ने खैर काटकर छि‍पाई गई लकड़ी भी जब्त की थी। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. खैर की लकड़ी का अवैध परिवहन करते ट्रक पकड़ा गया
  2. पानीपत का विराग लोहार और गोंडा का अर्जुन राणा गिरफ्तार
  3. नागौद के कोलाड में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। सतना के जंगलों में सागौन के बाद अब खैर के पेड़ भी तस्करों के निशाने पर हैं। सिंहपुर, बरौंधा और नागौद वनपरिक्षेत्र में खैर के पेड़ों की कटाई के मामले सामने आने से जंगलों में सक्रिय लकड़ी तस्करी के नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वाहन से लकड़ी मिलने पर वन अपराध प्रकरण दर्ज

हालिया मामले में नागौद वनपरिक्षेत्र के ग्राम कोलाड में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में खैर की लकड़ी का अवैध परिवहन करते ट्रक पकड़ा गया। वाहन से लकड़ी मिलने पर वन अपराध प्रकरण दर्ज कर पानीपत निवासी विराग लोहार और गोंडा निवासी अर्जुन राणा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।


यह पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकने में भी अहम

खैर की लकड़ी यूपी और हरियाणा तक भेजे जाने की बात भी सामने आती है। इसके भीतर के हिस्से से कत्था बनता है, जबकि लकड़ी की कठोरता के कारण इसका इस्तेमाल निर्माण, कृषि उपकरण और ईंधन में होता है। औषधीय उपयोग के साथ यह पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकने में भी अहम है।

शिकायत के बाद जांच में मिले थे कटाई के प्रमाण

वन विभाग से जंगल के अंदर खैर के खड़े पेड़ों कि बहुतायत में काटे जाने कि शिकायत के बाद वन विभाग जब क्रियाशील हुआ तो उसे मझगवां व बरौंधा से सटे सिंहपुर रेंज में भारी मात्रा में खैर के पेड़ों को कटाकर उन्हें जंगल में ही छिपाएं जाने के प्रमाण प्राप्त हुए है और साथ ही विभाग ने खैर काटकर छि‍पाई हुई लकड़ी भी जब्त की थी।

ट्रक जांच के दौरान पकड़कर वन विभाग को सौंपा

इस घटना के महज पांच-छह दिन बाद नागौद थाना पुलिस ने लकड़ी से भरा हरियाणा जाने वाले ट्रक को जांच के दौरान पकड़कर वन विभाग को सौंपा दिया। वन विभाग कि जांच में चौकाने वाली बाते निकलकर सामने आई। जिसमें पता चला कि ट्रक में लोड खैर कि लकड़ी हरियाणा ले जाई जा रहीं थी। हालंकि इस प्रकरण के बाद भी विभाग खैर के असली अवैध कारोबारियों तक नहीं पहुंच सका।

यूपी-हरियाणा तक पहुंच रही लकड़ी

खैर की लकड़ी की मांग स्थानीय स्तर से बाहर भी है। जिले के जंगलों से निकलने वाली लकड़ी के उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक पहुंचने की बात सामने आती रही है।

कटाई का संबंध बाहर के बाजार से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला से

इससे आशंका है कि सतना के वनक्षेत्रों में होने वाली कटाई का संबंध बाहर के बाजार से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला से हो सकता है। ऐसे में जांच का दायरा केवल स्थानीय कटाई तक सीमित रखने के बजाय लकड़ी के खरीदार, परिवहनकर्ता, भंडारण स्थल और अंतिम बाजार तक बढ़ाने की जरूरत है।

विभाग की जांच में किसी बाहरी नेटवर्क का हाथ

विभागीय सूत्रों कि मानें तो विभाग ने अपनी जांच में किसी बाहरी नेटवर्क का हाथ होना पाया है। हालंकि यह बात और है कि इस पर वाहन चालक, सहायक एवं खैर कि लकड़ी जब्त करने के अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

कत्था से लेकर निर्माण तक उपयोग

खैर की लकड़ी का महत्व इसकी उपयोगिता के कारण है। पेड़ के भीतरी हिस्से को उबालकर कत्था प्राप्त किया जाता है, जिसका उपयोग पान के साथ-साथ रंगाई-छपाई में भी होता है। इसकी लकड़ी बेहद कठोर, टिकाऊ और दीमक-प्रतिरोधी मानी जाती है, इसलिए इसका उपयोग निर्माण कार्य, कृषि उपकरण और ईंधन में भी किया जाता है।

पारंपरिक औषधीय उपयोग भी बताया जाता

छाल, जड़ और लकड़ी का पारंपरिक औषधीय उपयोग भी बताया जाता है। खैर शुष्क और कम पानी वाले क्षेत्रों में भी उगने वाला पेड़ है। इसकी गहरी जड़ें मिट्टी को बांधे रखने में मदद करती हैं, जिससे मिट्टी के कटाव को रोकने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में खैर की अवैध कटाई केवल लकड़ी के अवैध कारोबार का मामला नहीं, बल्कि जंगल के प्राकृतिक संतुलन से भी जुड़ा विषय है।

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