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सतना में क्लाउड की चौकसी करेगा एआई डिवाइस, खतरा भांपते ही देगा अलर्ट; ऐसे करेगा काम

प्रस्तावित डिवाइस क्लाउड से आने-जाने वाले डेटा और वहां होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा। यदि किसी गतिविधि का तरीका सामान्य से अलग दिखाई देता ह...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 10:46:01 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 10:46:01 PM (IST)
सतना में क्लाउड की चौकसी करेगा एआई डिवाइस, खतरा भांपते ही देगा अलर्ट; ऐसे करेगा काम
एआई डिवाइस की प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. डेटा जरूरत पड़ने पर कहीं से भी करते हैं इस्तेमाल
  2. अस्पताल और उद्योगों तक के लिए उपयोगी होगा
  3. पैटर्न मशीन लर्निंग के जरिए तैयार किया जा सकता है

शिवम कृष्ण त्रिपाठी, नईदुनिया, सतना। मोबाइल में फोटो, वीडियो और दस्तावेज रखने से लेकर अस्पतालों में मरीजों का रिकार्ड, बैंकों में खातों की जानकारी और कंपनियों का महत्वपूर्ण डेटा इंटरनेट के जरिए क्लाउड पर सुरक्षित रखा जा रहा है। ऐसे में लोग अपना डेटा जरूरत पड़ने पर कहीं से भी इस्तेमाल करते हैं।

साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए उपयोगी

क्लाउड व्यवस्था को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और मशीन लर्निंग आधारित क्लाउड सिक्योरिटी डिटेक्टिंग डिवाइस की अवधारणा विकसित की गई है।

इस तकनीकी को इन लोगों ने विकसित किया

इस तकनीकी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट के डाॅ. अमित अग्निहोत्री, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के डाॅ. देवरस पांडे और डाॅ. गौरी शंकर कुशवाहा, आईआईटी बिहटा के शुभम कुमार सहित अन्य शोधकर्ताओं ने विकसित किया है।

ऐसे समझें क्लाउड को

मान लीजिए किसी अस्पताल के कंप्यूटर में मरीजों की जांच रिपोर्ट सीधे उसी कंप्यूटर में रखने के बजाय इंटरनेट के जरिए एक बड़े डेटा सेंटर में सुरक्षित रखी जाती है तो डाक्टर अधिकृत लागिन से कहीं से भी रिपोर्ट देख सकते हैं। इसका फायदा यह होता है कि डेटा को अलग-अलग कंप्यूटरों में रखने की जरूरत कम होती है।


...लेकिन इसके साथ खतरा भी

अधिकृत व्यक्ति इंटरनेट के जरिए उसे इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ खतरा भी है। यदि कोई साइबर अपराधी चोरी किए गए पासवर्ड से सिस्टम में घुसने की कोशिश करे, तो बड़ी मात्रा में डेटा अचानक बाहर भेजा जाए या किसी खाते से असामान्य समय पर लगातार लागिन किए जाएं तो यह सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत हो सकता है।

पहले सीखेगा कि सामान्य गतिविधि कैसी है

प्रस्तावित प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि यह क्लाउड नेटवर्क के सामान्य व्यवहार को समझने का प्रयास करेगी। कौन सा डेटा कितनी मात्रा में और किस तरह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है, कौन-से उपयोगकर्ता सामान्य समय में लागिन करते हैं।

सिस्टम उसे पहचानकर अलर्ट कर सकता

किस प्रकार की गतिविधियां नियमित रूप से होती है, इसका पैटर्न मशीन लर्निंग के जरिए तैयार किया जा सकता है। इसके बाद यदि अचानक इस सामान्य पैटर्न से अलग गतिविधि दिखाई देती है तो सिस्टम उसे पहचानकर अलर्ट कर सकता है। यानी मशीन ‘सामान्य’ क्या है और फिर ‘असामान्य’ को पकड़ने का प्रयास करेगी।

किस तरह के खतरे पकड़े जा सकते हैं

  • किसी कर्मचारी के खाते से अचानक असामान्य समय पर लागिन होना।
  • चोरी किए गए पासवर्ड से कोई व्यक्ति सिस्टम में प्रवेश करने का प्रयास करे।
  • सामान्य से बहुत अधिक मात्रा में डेटा अचानक बाहर भेजा जाने लगे।
  • कोई संदिग्ध व्यक्ति बार-बार सर्वर या खाते तक पहुंचने की कोशिश करे।
  • किसी कंप्यूटर या खाते के व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव दिखाई दे।
  • मैलवेयर या अन्य साइबर हमले से जुड़ी असामान्य डेटा गतिविधि सामने आए।
  • किसी अधिकृत खाते का इस्तेमाल ऐसी गतिविधि के लिए होने लगे, जो उसके सामान्य काम से मेल नहीं खाती।

खतरा मिला तो अलर्ट के साथ कार्रवाई भी करेगा

सिस्टम में केवल खतरे की सूचना देने के बजाय स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र भी प्रस्तावित है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तय सुरक्षा नियमों के अनुसार संबंधित पहुंच को सीमित करने, संदिग्ध गतिविधि को अलग करने या सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इससे खतरे का पता चलने और सुरक्षा प्रतिक्रिया के बीच लगने वाला समय कम करने का प्रयास होगा।

एलएसटीएम और रैंडम फारेस्ट करेंगे डेटा का विश्लेषण

इस तकनीकी ढांचे में एलएसटीएम (लान्ग शार्ट-टर्म मेमोरी) और रैंडम फारेस्ट जैसे मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के इस्तेमाल की परिकल्पना है। एलएसटीएम समय के साथ होने वाली गतिविधियों के क्रम को समझने में मदद कर सकता है। वहीं रैंडम फॉरेस्ट अलग-अलग संकेतों और आंकड़ों को देखकर गतिविधियों को सामान्य या संदिग्ध श्रेणी में पहचानने में मदद कर सकता है।

इनके लिए है उपयोगी

क्लाउड पर संवेदनशील डेटा रखने वाले अस्पताल, विश्वविद्यालय, सरकारी कार्यालय, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान, उद्योग और अन्य संगठन इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था से लाभ उठा सकते हैं। उदाहरण के लिए अस्पताल में मरीजों का रिकार्ड, विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों का डेटा या किसी कंपनी में वित्तीय व व्यावसायिक जानकारी क्लाउड पर रखी है तो उस तक होने वाली असामान्य पहुंच पर निगरानी रखी जा सकती है।

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