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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 09, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Raksha Bandhan पर दिखा भावुक नजारा, जेल की सलाखों के बीच बंधा प्रेम का बंधन, 708 बहनों ने सजाई राखी की थाली

सतना केंद्रीय जेल में गुरुवार को यह नजारा दिल को छू लेने वाला था, जब 708 बहनें दूर-दूर से अपने बंदी भाइयों के लिए राखी का स्नेह लेकर पहुंचीं। सुबह से ...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 09 Aug 2025 08:26:25 PM (IST)Updated Date: Sat, 09 Aug 2025 08:26:25 PM (IST)
Raksha Bandhan पर दिखा भावुक नजारा, जेल की सलाखों के बीच बंधा प्रेम का बंधन, 708 बहनों ने सजाई राखी की थाली
जेल की सलाखों के बीच बंधा प्रेम का बंधन।

HighLights

  1. 708 बहनें अपने बंदी भाइयों के लिए राखी का स्नेह लेकर पहुंचीं
  2. रक्षाबंधन को लेकर जेल प्रशासन ने की थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
  3. बहनों ने कराया मुंह मीठा, परिजनों को देख छलक पड़ीं आंखें

नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। रक्षाबंधन का त्योहार भले ही सलाखों के भीतर हो, लेकिन बहन-भाई के रिश्ते की डोर किसी दीवार या ताले से बंधी नहीं होती। सतना केंद्रीय जेल में गुरुवार को यह नजारा दिल को छू लेने वाला था, जब 708 बहनें दूर-दूर से अपने बंदी भाइयों के लिए राखी का स्नेह लेकर पहुंचीं।

सुबह से ही सतना, मैहर, रीवा, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और सीधी जिलों से बहनों का जत्था जेल के मुख्य द्वार पर पहुंचने लगा। त्योहार को लेकर जेल प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और अलग-अलग जिले के बंदियों के लिए विशेष काउंटर बनाए थे, ताकि भीड़ भी नियंत्रित रहे और बहनों को आसानी से मिलने का मौका मिले।


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भावनाओं से भीगी आंखें

दोपहर 2 बजे तक 708 बहनों ने रजिस्ट्रेशन कर भाई से मिलने की औपचारिकताएं पूरी कीं। यह सिलसिला शाम 4 बजे तक चलता रहा। जैसे ही कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरकर बहनें अंदर पहुंचीं और भाइयों ने उन्हें देखा, कई आंखें भर आईं। बहनों ने माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारी, राखी बांधी और मिठाई खिलाई। जेल के भीतर ही मिठाई का प्रबंध किया गया था, क्योंकि बाहर से कोई भी खाद्य सामग्री लाने की अनुमति नहीं थी।

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त्योहार में शामिल हुए पूरा परिवार

रक्षाबंधन पर सिर्फ बहनें ही नहीं, बल्कि कई बंदियों के बच्चे, भांजे और नाती-पोते भी जेल पहुंचे थे। छोटे-छोटे कदम दौडक़र पिता या दादा से लिपट जाते, तो बंदियों के चेहरे पर वह मुस्कान लौट आती जो शायद लंबे समय से कहीं खो गई थी। बहनों ने भाइयों के कान में चुपचाप दुआएं फुसफुसाईं — उनकी रिहाई, स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन के लिए।

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प्रशासन का मानवीय पक्ष

जेल अधीक्षक लीना कोष्टा स्वयं मौके पर मौजूद रहीं और कई बहनों को ढांढस बंधाया। उनके साथ जेल उप अधीक्षक अभिमन्यु पांडेय और स्टाफ का पूरा दल सुरक्षा और व्यवस्था में जुटा रहा। त्योहार की गर्माहट और अनुशासन के बीच तालमेल बनाए रखना जेल प्रशासन के लिए चुनौती था, जिसे उन्होंने संवेदनशीलता के साथ निभाया।

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रक्षाबंधन का असली संदेश

जेल के माहौल में भी यह त्योहार एक अलग ही रंग लेकर आया है। यहां न कोई महंगे उपहार थे, न सजावट की होड़, सिर्फ अपनापन, प्रतीक्षा और एक-दूसरे की सलामती की दुआ। सलाखों के बीच भी रिश्तों का बंधन और विश्वास की डोर अटूट रही। रक्षाबंधन का यह दिन शायद बंदियों और उनके परिवारों के लिए साल का सबसे भावुक दिन बन गया। जब राखी के धागे ने दूरियों को पिघलाकर रिश्तों को फिर से जोड़ दिया, तब महसूस हुआ कि प्रेम और अपनापन किसी दीवार से नहीं रुक सकता।

ये भी पढ़ें- 'रक्षाबंधन पर आती है आपकी बहुत याद, लेकिन...', पाकिस्तान की जेल में बंद भाई के नाम बहन का भावुक खत

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जेल में बंद भाइयों को 708 बहनों ने बांधी राखी

रक्षाबंधन पर बंदियों की मुलाकात का आंकड़ा (09 अगस्त 2025)

क्र. जेल का नाम बंदी संख्या परिजनों की संख्या

1 केन्द्रीय जेल सतना 913 2280

2 जिला जेल छतरपुर 269 796

3 जिला जेल पन्ना 193 808

4 सब जेल मैहर 128 505

5 सब जेल नागौद 59 322

6 सब जेल बिजावर 66 264

7 सब जेल लवकुशनगर 38 141

8 सब जेल नौगांव 43 182

9 सब जेल पवई 71 317