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नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। शरद पूर्णिमा पर धर्मनगरी चित्रकूट में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। दमा, अस्थमा, श्वास और पुरानी खांसी की औषधि लेने के लिए एक लाख से अधिक श्रद्धालु और मरीज चित्रकूट पहुंच चुके हैं।
कामदगिरि परिक्रमा मार्ग से लेकर प्रमुख मंदिरों और सड़कों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। कोई परिवार के बुजुर्ग सदस्य को लेकर आया है, तो कोई वर्षों से चली आ रही सांस की बीमारी से राहत मिलने की उम्मीद में यहां पहुंचा है।
मिट्टी के घड़ों में पक रही खीर, आधी रात का इंतजार
शरद पूर्णिमा की रात यहां खीर तैयार करने की परंपरा के बीच मिट्टी के घड़ों में खीर पकाई जा रही है। मान्यता के अनुसार, रात 12 बजे वैद्य इसी खीर में औषधि मिलाकर मरीजों को वितरित करेंगे।
इसी प्रसाद रूपी खीर को लेने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग चित्रकूट पहुंचे हैं। जैसे-जैसे रात आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मरीजों और उनके परिजनों की उत्सुकता भी बढ़ती जा रही है।
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किसी को दूसरी, तो किसी को तीसरी बार भरोसा
यहां पहुंचे कई मरीजों का कहना है कि वे पहले भी शरद पूर्णिमा पर औषधि लेने चित्रकूट आ चुके हैं। कुछ लोग दूसरी तो कुछ तीसरी बार यहां पहुंचे हैं।
उनके अनुसार, पिछली बार औषधि लेने के बाद उन्हें आराम महसूस हुआ था, इसलिए इस बार भी वे अपने परिजनों के साथ आए हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं, जो लंबे समय से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे सदस्यों के लिए राहत की उम्मीद लेकर पहुंचे हैं।
आस्था और आयुर्वेद का संगम
चित्रकूट में शरद पूर्णिमा पर औषधियुक्त खीर वितरण की परंपरा वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। श्रद्धालु इसे कामदगिरि की कृपा और आयुर्वेद से जुड़ी परंपरा का संगम मानते हैं।
आधी रात को खीर में औषधि मिलने की प्रतीक्षा के बीच धर्मनगरी का माहौल भक्तिमय बना हुआ है। कामदगिरि की परिक्रमा, मंदिरों में दर्शन और औषधि प्राप्त करने की आस ने पूरे चित्रकूट को श्रद्धालुओं की भीड़ से भर दिया है।
चिकित्सकीय सावधानी
औषधियुक्त खीर को पारंपरिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन दमा और अस्थमा जैसी बीमारियों में इसे प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए। मरीज चिकित्सक की सलाह से अपनी नियमित दवाएं जारी रखें।