
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। प्रभु श्री राम की तपोस्थली चित्रकूट व आस्था की जिस गुफा में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के दरबार लगाने की मान्यता है, उसी गुप्त गोदावरी में अब चट्टानों से गिरते पत्थर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चिंता का कारण बन गए हैं।
गुरुवार को खटखटा चोर के पास फिर पत्थर गिरने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। शाम करीब सात बजे एसडीएम महिपाल सिंह गुफा का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने स्वयं गुफा के भीतर जाकर स्थिति देखी और प्रथम गुफा को तत्काल सील करने के निर्देश दिए।

इससे पहले पत्थर गिरने की घटना में शंकर भगवान की मूर्ति खंडित हो चुकी है। गुरुवार को हुई नई घटना में फिलहाल किसी श्रद्धालु के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन गुफा के भीतर रामदरबार के आसपास चट्टानों की परतें कमजोर होने की आशंका ने खतरा बढ़ा दिया है।
प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही गुफा की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति स्पष्ट होगी। निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर परिषद अधिकारी अंकित सोनी, नायब तहसीलदार कमलेश भदौरिया, गोदावरी प्रभारी संदीप त्रिपाठी सहित संबंधित कर्मचारी मौजूद रहे।

गुफा के भीतर चट्टानों में दरार और ज्वाइंट दिखाई देने की बात सामने आई है। लगातार बारिश के कारण प्राकृतिक गुफा में पानी का रिसाव भी बढ़ा है। ऐसे में कमजोर अथवा ज्वाइंट वाले पत्थरों के खिसकने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने पत्थर गिरने की वजह को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जांच के बाद ही कारण निर्धारित किया जाएगा।
एसडीएम महिपाल सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विशेषज्ञों की जांच और सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट आने तक पहली गुफा में श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं होगा। मुख्य नगर परिषद अधिकारी को गुफा सील करने के निर्देश इसी एहतियात के तहत दिए गए हैं।
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गुप्त गोदावरी चित्रकूट की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मान्यता है कि वनवास काल में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण यहां आए थे और गुफा में उनका दरबार लगा था। संकरी प्राकृतिक चट्टानी संरचनाओं के बीच बहती जलधारा, रामदरबार और गुफा का प्राकृतिक स्वरूप श्रद्धालुओं को यहां खींच लाता है।

यही कारण है कि बारिश के मौसम में गुफा की सुरक्षा का प्रश्न और महत्वपूर्ण हो जाता है। जिस स्थान को श्रद्धालु आस्था से नमन करते हैं, वहां गिरता एक-एक पत्थर प्रशासन के लिए चेतावनी है।
फिलहाल प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रवेश रोकने का निर्णय लिया है। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट बताएगी कि गुप्त गोदावरी की चट्टानें कितनी सुरक्षित हैं और श्रद्धालुओं के लिए गुफा को दोबारा कब खोला जा सकता है।