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सतना के नारायण मुक्तिधाम को सबसे पवित्र स्थान बता कन्या खिलाने पर बहस, पढ़ें कितना उचित है श्मशान में भोज

फूलमती केवट की इस पहल ने एक सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या पवित्रता किसी स्थान की पहचान से तय होती है या वहां की भावना और उद्देश्य से?

By Mayank MishraEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 05:42:18 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 05:42:18 PM (IST)
सतना के नारायण मुक्तिधाम को सबसे पवित्र स्थान बता कन्या खिलाने पर बहस, पढ़ें कितना उचित है श्मशान में भोज
नारायण मुक्तिधाम में कन्या भोजन करवातीं फूलमती। नईदुनिया

HighLights

  1. आस्था पर स्वास्थ्य व सेहत पर बहस
  2. बच्चों की सेहत को लेकर उठ रहे प्रश्न
  3. घरों और पंडालों से श्मशान तक पहुंचा

नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। एक तरफ देवी के नौ दिन में नौ कन्या खिलाने का रिवाज अब लोगों के घरों, पंडालों, संस्थाओं से निकलकर अब श्मशान घाट तक पहुंच गया है। इसके साथ कन्या भोजन करने वाली बच्चियों के स्वास्थ्य व सेहत को लेकर भी बात छिड़ गई।

आस्था से जुड़ी मान्यताओं के बीच अनूठी पहल

धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ी मान्यताओं के बीच मथुरा बस्ती निवासी फूलमती केवट की एक अनूठी पहल चर्चा का विषय बन गई है। फूलमती ने नारायण मुक्तिधाम में कन्या भोज का आयोजन कराया। फूलमती ने मुक्तिधाम को सबसे पवित्र स्थान बताते हुए यहां कन्याओं को भोजन कराने की पहल की।


कन्या भोज को लेकर अलग दृष्टिकोण

श्मशान में कन्या भोज कराने के इस निर्णय को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। आमतौर पर कन्या भोज का आयोजन मंदिरों, घरों और सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर किया जाता है। ऐसे में मुक्तिधाम जैसे स्थान पर इस तरह का आयोजन परंपरागत सोच से अलग नजर आता है।

व्यक्तिगत धार्मिक विश्वास का नजरिया

फूलमती केवट की इस पहल को जहां आस्था और व्यक्तिगत धार्मिक विश्वास के नजरिये से देखा जा सकता है, वहीं आयोजन में शामिल बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

तंत्र विद्या से जोड़कर भी देख रहे हैं लोग

पूजा-पाठ आदि कराने वाले ब्राम्हाणों-पंडितों के अनुसार श्मशान स्थान भले ही कितना पवित्र हो लेकिन वहां ऐसे कार्य नहीं किए व कराएं जा सकते है। ऐसे कार्य वहीं करते है, जिन्हे तंत्र-मंत्र आदि से जुडे होते हैं। कुछ लोग इसे अब तंत्र विद्या से जोड़कर भी देख रहे हैं।

नश्वरता का प्रतीक है श्मशान

श्मशान को कई लोग जीवन की नश्वरता का प्रतीक मानते हैं। यहां अंतिम संस्कार के माध्यम से इंसान को जीवन की सच्चाई का एहसास होता है। फूलमती केवट ने इसी स्थान को पवित्र मानकर कन्या भोज कराया।

प्रेरणा और मान्यता को समझना महत्वपूर्ण

उनकी इस पहल के पीछे की व्यक्तिगत प्रेरणा और मान्यता को समझना भी महत्वपूर्ण है। किसी भी धार्मिक आयोजन में स्थान की स्वच्छता, भोजन की सुरक्षित व्यवस्था और बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।

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