
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। जिले में पदस्थ रहे कांस्टेबल वरुण द्विवेदी को बर्खास्तगी के करीब 13 साल बाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी के आदेशों को निरस्त करते हुए उन्हें परिणामी लाभ दिए जाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उन्हें बकाया वेतन का लाभ नहीं मिलेगा।
जस्टिस विशाल धगट की पीठ ने 16 सितंबर 2026 को रिट याचिका क्रमांक डब्ल्यूपी-11360/2013 पर सुनवाई करते हुए 20 मार्च 2013, 2 मई 2013 और 17 जून 2013 को जारी किए गए दंड संबंधी आदेशों को निरस्त कर दिया। न्यायालय के इस निर्णय के बाद कांस्टेबल वरुण द्विवेदी की सेवा में बहाली का रास्ता साफ हो गया है।
इन आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई करते हुए वरुण द्विवेदी के खिलाफ दंडात्मक आदेश जारी किए गए थे। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विभागीय जांच में प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण किया।
कोर्ट ने पाया कि जिस व्यक्ति को प्रताड़ित किए जाने का आरोप था, वह और उसके परिवार के सदस्य विभागीय जांच के दौरान अपने पूर्व कथनों से मुकर गए थे। वहीं पुलिस अधिकारियों की गवाही को न्यायालय ने सुनी-सुनाई प्रकृति का माना। कोर्ट के अनुसार आरोपों को साबित करने के लिए आवश्यक विधिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए तीनों विवादित दंड आदेश रद्द कर दिए। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को परिणामी लाभ का हकदार माना है। इसमें काल्पनिक वेतन वृद्धि और वरिष्ठता का लाभ शामिल है। हालांकि बर्खास्तगी अवधि का बकाया वेतन देने का आदेश नहीं दिया गया है।
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