सतना में वनभूमि पर बने आश्रमों के मठाधीशों को वन विभाग ने थमाया नोटिस, साधु-संतों में मचा हड़कंप, तीन मौकों के बाद होगी बेदखली की कार्रवाई
बीते दशकों से वनभूमि पर स्थापित आश्रमों पर वनविभाग ने एक्शन लेना शुरू किया है और लगभग ऐसे करीब पांच आश्रमों के मठाधीशों को नोटिस थमाया है।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 06:49:42 PM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 06:53:16 PM (IST)
प्रतीकात्मक फोटो।HighLights
- तपस्या व भजन-साधना करने वाले संतों के सामने परेशानी
- स्वयं से वनभूमि मुक्त करने के तीन मौके मिलेंगे
- डिनोटिफाइड वनभूमि पर स्थापित हैं बडे़-बडे़ आश्रम
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। बीते दशकों से वनभूमि पर स्थापित आश्रमों पर वनविभाग ने एक्शन लेना शुरू किया है और लगभग ऐसे करीब पांच आश्रमों के मठाधीशों को नोटिस थमाया है। यह नोटिस वन अधिनियम की धारा 80 के तहत दिया गया है। जिसके बाद से अब साधु-संतों में हड़कंप मचा हुआ है।
वनमंडल सतना अंतर्गत आने वाले वनपरिक्षेत्र मझगवां के वनक्षेत्र सरभंगा में एक लंबे अर्से से यह आश्रम वनभूमि पर स्थापित हैं और यहां कालांतर से साधु-संत रहकर अपनी तप-साधना करते आ रहे हैं।
तपस्या व भजन-साधना करने वाले संतों के सामने परेशानी
अब वन विभाग द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद वन में रहकर तपस्या व भजन-साधना करने वाले संतों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। वन विभाग ने यह कार्रवाई वनभूूमि को पूरी तरह मुक्त कराने के उददेश्य से की है। विभाग की कार्रवाई के खिलाफ चित्रकूट विधायक व केंद्रीय कृषि मंत्री धरना प्रदर्शन कर चुके हैं।
बावजूद इसके विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की चर्चा है। कुछ लोगों के मुताबिक प्रदेश स्तर पर यह पहला मौका होगा, जब वन विभाग ने सीधे तौर पर वनों के अंदर वनभूमि पर स्थापित आश्रमों को नोटिस तामील कराया हो।
तीन मौके के बाद बेदखली की कार्रवाई
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग ने धारा 80 के तहत हसानंद सरस्वती, फक्कड़ बाबा सरभंगा समेत कुल नौ आश्रमों एवं रोहित केवट पिता रघुवीर केवट, पंकज कुमार पांडेय पिता राजमन पांडेय अमिरती, आर्दष त्रिपाठी, रामजुड़ावन त्रिपाठी, शिवनरेष मिश्रा, पिता रामबहोर मिश्रा, अमिरती को नोटिस दिया है।
अब उन्हें स्वयं से वनभूमि मुक्त करने के तीन मौके मिलेंगे। जिसके बाद विभाग बेदखली की कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है। तत्पश्चात वन विभाग अतिक्रमण हटाने के लिए यह पूरा मामला टास्क फोर्स को भेजेगा, जो वनभूमि खाली कराने का काम करेगी।
नुकसान की भरपाई का मामला कोर्ट में चलेगा
वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बीते लंबे समय से वन भूमि पर स्थापित आश्रमों व अन्य स्थायी व अस्थायी ठिकानों अथवा घरों की वजह से वन संरक्षण, संवर्धन में हुई हानि का मामला कोर्ट में चला जाएगा। जहां से भरपाई के प्रयास किया जाएगा। आगामी सात-आठ नंवबर को ईको कोर्ट लगना संभावित है। जहां वन विभाग इन प्रकरणों को रख सकता है।
डिनोटिफाइड वनभूमि पर स्थापित हैं बडे़-बडे़ आश्रम
इस बीच प्रमुख बात यह है कि सतना वनमंडल की विभिन्न वनपरिक्षेत्र अंतर्गत घनघोर जंगल के अंदर बड़े-बडे़ आश्रम स्थापित हैं। कंक्रटी के सहारे जिस वनभूमि पर यह आश्रम बने हुए हैं, वह डिनोटिफाइड है। यानि चारों ओर से वन से घिरे होने के बाद भी जंगल की भूमि के रुप में दर्ज न होकर उससे अलग भूमि है।
खैर, यह एक जांच का विषय है। आखिर इन्हें किन नियमों के तहत इतने बड़े एरिया में वन भूमि आश्रम निर्माण के लिए उपलब्ध कराई गई।
डिप्टी रेंजर द्वारा वनभूमि पर स्थापित आश्रमों आदि अन्य को धारा 80 के तहत नोटिस दिया गया है। आगे की कार्रवाई जारी है।
-रंजन सिंह परिहार, वनपरिक्षेत्राधिकारी, मझगवां