‘हमारे शिक्षक’ App हुआ बंद, सतना में ई-हाजिरी न लगने से टीचर्स परेशान
MP News: मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से जिस शिक्षक एप ‘हमारे शिक ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 08 Jan 2026 02:26:08 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Jan 2026 02:26:08 PM (IST)
सुबह 10 बजे से बंद पड़ा ‘हमारे शिक्षक’ AppHighLights
- सुबह 10 बजे से बंद पड़ा ‘हमारे शिक्षक’ एप।
- कनेक्शन एर- टाइम आउट ने बिगाड़ी व्यवस्था।
- उपस्थिति के बावजूद अनुपस्थित लग रहे शिक्षक।
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से जिस शिक्षक एप ‘हमारे शिक्षक’ का संचालन शुरु किया था।
वह एप गुरुवार की सुबह दस बजे से ही काम करना बंद कर दिया और अब यह शिक्षकों के लिए राहत कम डिजिटल उत्पीडऩ व मानसिक तनाव का कारण साबित होने लगा है।
दरअसल गुरुवार को अतिथि शिक्षक जैसे ही अपने-अपने विद्यालय पहुंचकर ‘हमारे शिक्षक’ एप के जरिए सुबह दस बजे अपनी उपस्थिति लगाने के लिए उसे खोला तो एप ने कनेक्शन एरर, टाइम आउट, एरर 402 और 502 जैसी समस्याओं के चलते लगभग 90 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण, नगरीय, नियमित और अतिथि शिक्षक ई-हाजिरी नहीं लगा सके।
सबसे ज्यादा समस्या सतना जिला के पहाउ़ी अंचल परसमनिया व मैहर जिला के रामनगर कस्बा क्षेत्र से सामने आई। जहां अतिथि शिक्षकों को अब यह डर सताने लगा है कि कहीं वह उपस्थित होकर भी अनुपस्थित न हो जाएं।
अतिथि शिक्षकों ने लगाएं आरोप
अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने बिना जमीनी हकीकत को समझे और बिना पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए इस एप को अनिवार्य कर दिया। अतिथि शिक्षकों को न तो सरकारी मोबाइल दिए गए, न ही सिम या डेटा की सुविधा। वहीं नियमित शिक्षकों को भी घटिया गुणवत्ता के मोबाइल थमाकर इस डिजिटल जाल में उलझा दिया गया।
एप में लाइव लोकेशन, प्रोफाइल अपडेट और सेल्फी के जरिए उपस्थिति अनिवार्य की गई है, लेकिन कभी फेस रीडिंग फेल हो जाती है, कभी रेटिना नहीं पढ़ता, तो कभी लोकेशन ही नहीं मिलती। हालात ऐसे हैं कि हाजिरी लगाने में 5-10 मिनट नहीं, बल्कि कई बार घंटों लग जाते हैं।
इस दौरान शिक्षक न बच्चों को ठीक से पढ़ा पा रहे हैं और न ही अन्य शैक्षणिक कार्य कर पा रहे हैं। ऊपर से मोबाइल नंबर और आधार नंबर के संभावित दुरुपयोग की आशंका ने निजता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था डिजिटल बुल्लिंग और हैरेसमेंट का रूप ले चुकी है।