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मजदूरों की फर्जी लिस्ट तैयार कर रिश्तेदारों के बैंक अकाउंट में डलवा दी सैलरी, मैहर में 35 लाख की धोखाधड़ी

Maihar News: शिकायत के अनुसार, भुगतान निकलने के बाद रकम मजदूरों के बजाय दोनों आरोपियों के रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा कराई गई।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 08:22:17 AM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 08:31:08 AM (IST)
मजदूरों की फर्जी लिस्ट तैयार कर रिश्तेदारों के बैंक अकाउंट में डलवा दी सैलरी, मैहर में 35 लाख की धोखाधड़ी
पुलिस ने मजदूरों की लिस्ट में फर्जी नाम जोड़कर धोखाधड़ी करने के मामले में जांच शुरू की। - एआई इमेज

HighLights

  1. अल्ट्राटेक में काम करने वाली कंपनी से करीब 35 लाख की धोखाधड़ी
  2. पुलिस ने कंपनी की शिकायत पर दो सगे भाईयों को किया गिरफ्तार
  3. दोनों के नौकरी छोड़ने के बाद मामला सामने आने पर कंपनी ने की शिकायत

नईदुनिया प्रतिनिधि, मैहर। अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग में काम करने वाली ठेका कंपनी में मजदूरों की ऐसी सूची तैयार की गई, जिनके नाम पर भुगतान तो निकला, लेकिन रकम कथित तौर पर रिश्तेदारों के बैंक खातों में पहुंचती रही। करीब 35 लाख रुपये की इस धोखाधड़ी के मामले में मैहर पुलिस ने बालाघाट निवासी दो सगे भाइयों जैनेन्द्र पातरे और संदीप पातरे को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद एक दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

मामला पुणे महाराष्ट्र की कंपनी आयोकि फैब्रिकन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जो मैहर स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग में कार्यरत है। कंपनी के कर्मचारी ने पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह से शिकायत की थी कि दोनों भाई वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान कंपनी में काम करते थे। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर फर्जी मजदूरों की सूची तैयार कर उनके नाम पर कंपनी से भुगतान निकलवाया।


कंपनी ने की पुलिस से शिकायत

शिकायत के अनुसार, भुगतान निकलने के बाद रकम मजदूरों के बजाय दोनों आरोपियों के रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा कराई गई। इस तरह कंपनी को करीब 35 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। नौकरी छोड़ने के बाद मामला सामने आने पर कंपनी की ओर से पुलिस से शिकायत की गई।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सीएसपी महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में मामले की जांच की गई। जांच के बाद दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि फर्जी सूची में कितने मजदूरों के नाम शामिल किए गए थे, कितनी रकम किस-किस खाते में पहुंची और इस पूरी प्रक्रिया में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। बैंक खातों और कंपनी के भुगतान संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

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