
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। ट्रक के नीचे आवारा श्वान आ जाने से उसकी मौत क्या हुई, कुछ लोगों ने ट्रक चालक को ही निशाना बना लिया। बंदूकधारी दो चारपहिया वाहनों से पीछा कर चालक रंजीत विश्वकर्मा के साथ जमकर मारपीट किए जाने का आरोप है।
जान बचाने के लिए चालक ट्रक को राजमार्ग पर छोड़कर जंगल की ओर भागा और डायल 112 पर फोन कर मदद मांगी। लेकिन पुलिस के पास पहुंचने के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। आरोप है कि करीब 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस ने न उसकी चिकित्सकीय जांच (एमएलसी) कराई, न इलाज उपलब्ध कराया और न ही उसकी शिकायत पर कार्रवाई की। इस दौरान चालक दर्द से कराहता रहा और पुलिस उसे ट्रक सहित थाने में बैठाए रही।
काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो चालक वापस अपने वाहन के पास आया। इसके बाद पुलिस उसे ट्रक सहित मझगवां थाने ले गई। चालक के साथ कथित मारपीट के बावजूद उसकी चिकित्सकीय जांच और उपचार की व्यवस्था नहीं होने तथा शिकायत पर कार्रवाई न किए जाने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मझगवां थाना प्रभारी आदित्य नारायण धुर्वे का कहना है कि पहले राजमार्ग पर ट्रक खड़ा करने के मामले में चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद देखा जाएगा कि उसके साथ मारपीट हुई है या नहीं। वहीं, ग्रामीण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेम लाल कुर्वे ने कहा कि वह मामले की जानकारी लेकर बताएंगे।
घटना में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मारपीट की शिकायत करने वाले चालक को तत्काल चिकित्सकीय सहायता क्यों नहीं मिली? क्या राजमार्ग पर ट्रक खड़ा होने के मामले में कार्रवाई की बात करना, मारपीट के आरोपों की जांच और पीड़ित को उपचार उपलब्ध कराने से पहले जरूरी था? करीब 24 घंटे बाद भी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ऐसी घटनाएं अब मझगवां थाना पुलिस पर अपराधियो को संरक्षण देने की ओर भी इशारा कर रही है।
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