
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। मध्य प्रदेश के सरकारी छात्रावासों में छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की दावों की पोल खुल गई है। सतना और मैहर जिलों से सामने आई गंभीर घटनाओं ने छात्रावासों के प्रबंधन, भोजन की गुणवत्ता और राशन व्यवस्था की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सतना में जहां खाने में कीड़े मिलने पर छात्रों ने भोजन मवेशियों के आगे फेंककर विरोध जताया, वहीं मैहर में राशन न मिलने पर छात्राओं द्वारा खुद चूल्हा जलाकर खाना पकाने का वीडियो वायरल हुआ है।
सतना जिले के छात्रावासों से बदहाली की दो बड़ी घटनाएं सामने आईं:
कृपालपुर पिछड़ा वर्ग छात्रावास: 100 सीटर पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में छात्रों को परोसे गए भोजन में कीड़े पाए गए। आक्रोशित छात्रों ने विरोध दर्ज कराते हुए भोजन की थालियां मवेशियों के आगे रख दीं। छात्रों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ।
आदर्श नगर एससी छात्रावास: नई बस्ती स्थित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति (SC) छात्रावास के छात्रों ने घटिया भोजन, खाने में कीड़े और भरपेट खाना न मिलने का आरोप लगाते हुए देर रात कलेक्टर बंगले के बाहर धरना दिया। छात्रों ने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें अधीक्षक द्वारा डराया-धमकाया जाता है।
मैहर: 2 महीने से नहीं मिला राशन, छात्राओं ने खुद जलाया चूल्हा
मैहर स्थित 'वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय कन्या छात्रावास' का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें छात्राएं पढ़ाई छोड़कर चूल्हे पर खाना बनाती दिखीं। छात्राओं का आरोप है कि पिछले दो महीनों से छात्रावास में नियमित भोजन और राशन की आपूर्ति ही नहीं हो रही थी, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में खुद खाना पकाना पड़ रहा है।
मामला उजागर होने पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने छात्रावास की वार्डन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और छात्राओं से संवाद कर स्थिति का जायजा लिया है।
जनजातीय कार्य विभाग और राज्य सरकार की एकीकृत छात्रावास योजना के तहत विद्यार्थियों को नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण भोजन (नाश्ता, दोपहर व रात का खाना), आवास और बिजली-पानी देने का स्पष्ट प्रावधान है। इन व्यवस्थाओं के लिए सरकार हर साल भारी-भरकम बजट जारी करती है और अधीक्षक को जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों को कीड़े वाला खाना मिलना या खुद खाना पकाने पर मजबूर होना प्रशासनिक अनदेखी को उजागर करता है।
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