
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। उत्तर प्रदेश क्षेत्र में मंदाकिनी नदी के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नदी का वैज्ञानिक सीमांकन शुरू कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के निर्देश पर राजस्व, नगर पालिका और संयुक्त क्षेत्र विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम रोवर तकनीक से नदी क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण कर रही है। मध्य प्रदेश के हिस्से वाले चित्रकूट में अभी कोई हलचल नहीं है।
बता दें कि 29 अगस्त से आई बाढ़ के कारण चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के जलस्तर का 23 साल का रिकार्ड टूटा था। इसके बाद यह चर्चा शुरू हुई कि नदी के तट पर अतिक्रमण के कारण ही बाढ़ के हालात बने हैं।
मप्र के मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव भी बाढ़ के हालात देखने के लिए चित्रकूट पहुंचे थे। उन्होंने भी माना था कि अतिक्रमण के कारण ही चित्रकूट में हालात बिगड़ रहे हैं। तब उन्होंने चित्रकूट से अतिक्रमण हटाने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद से प्रशासनिक स्तर पर कुछ नहीं हुआ है।
रामघाट क्षेत्र में चल रहे सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल नदी की सीमा निर्धारित करना नहीं है, बल्कि मंदाकिनी के प्राकृतिक जल प्रवाह क्षेत्र और उससे जुड़ी जलधाराओं की वास्तविक स्थिति को भी चिह्नित करना है। रोवर तकनीक से नदी के किनारों और भू-भाग की सटीक स्थिति दर्ज की जा रही है।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि नदी का प्राकृतिक क्षेत्र वर्तमान में कहां तक है और समय के साथ उसके बहाव क्षेत्र में कितना परिवर्तन हुआ है। उत्तर प्रदेश में चल रहा सर्वेक्षण पूरा होने के बाद मंदाकिनी के प्राकृतिक क्षेत्र, जलधाराओं और बहाव मार्ग की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
संभावित अतिक्रमण की पहचान, जलस्रोतों के संरक्षण और भविष्य में निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने में प्रशासन को तकनीकी आधार मिल सकेगा। अब नजर इस बात पर है कि मध्य प्रदेश में भी वैज्ञानिक सीमांकन कब शुरू होता है। रामघाट सहित नदी के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति कब सामने आती है।
मंदाकिनी नदी की लंबाई करीब 12,500 मीटर है। नदी की चौड़ाई अलग-अलग स्थानों पर लगभग 40 से 160 मीटर तक दर्ज की गई है। बाढ़ के बाद नदी के दोनों किनारों पर कम से कम 500-500 मीटर क्षेत्र को अतिक्रमण और निर्माण से मुक्त रखने की आवश्यकता पर चर्चा हुई थी, लेकिन मध्य प्रदेश के हिस्से में कई स्थानों पर वास्तविक स्थिति इससे काफी अलग है। विशेषकर रामघाट और आसपास के क्षेत्र में नदी के प्राकृतिक फैलाव और बहाव क्षेत्र को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
29 अगस्त के बाद लगातार बारिश से मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति इतनी गंभीर हुई कि रामघाट से हनुमानधारा मार्ग का करीब 300 मीटर लंबा पुल बहाव की चपेट में आ गया। यह पुल वर्ष 1985 में निर्मित कैंटिलीवर पुल था। बाढ़ के दौरान पानी का स्तर हाई फ्लड लेवल से करीब 7 मीटर ऊपर पहुंच गया था। आरोग्यधाम क्षेत्र में भी पुल जलमग्न हो गया था।
मंदाकिनी नदी क्षेत्र में अतिक्रमण चिन्हित करने कमेटी गठित कि जा चुकी है, बहुत जल्द नदी का बैज्ञानिक सर्वे भी प्रारंभ कराया जाएगा।
डॉ. सतीश कुमार एस, जिला कलेक्टर, सतना
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