
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। जिला अस्पताल परिसर में मातृत्व विंग के बाहर रखे डस्टबिन में मिले मृत भ्रूण का मामला अब डीएनए जांच तक पहुंच गया है। करीब 1.7 किलोग्राम वजन के इस भ्रूण की पहचान के लिए अस्पताल प्रबंधन ने वैज्ञानिक जांच कराने का निर्णय लिया है।
पन्ना जिले के सलेहा की रहने वाली एक संदिग्ध महिला की सहमति से उसका रक्त नमूना लिया गया। वहीं पोस्टमार्टम के दौरान भ्रूण की जांघ की हड्डी (फीमर बोन) का नमूना भी सुरक्षित किया गया है।
दोनों नमूनों को जांच के लिए भोपाल की फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा। रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि डस्टबिन में मिला भ्रूण उक्त महिला का है या नहीं।
इस मामले में सबसे अहम कड़ी अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बनी है। फुटेज में 4 और 5 नवंबर की दरमियानी रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच एक महिला डस्टबिन में कुछ डालते दिखाई दी।
एक कैमरे में महिला का चेहरा ढका हुआ था, जबकि दूसरे कैमरे में उसकी गतिविधियां स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हुईं। बाद में फुटेज के आधार पर उसकी पहचान पन्ना जिले की उस महिला के रूप में किए जाने की बात सामने आई, जिसे गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मामले का संदेह तब गहराया, जब महिला के परिजनों द्वारा बताई गई गर्भावस्था की अवधि और बरामद भ्रूण की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया। परिजनों ने चिकित्सकों को बताया था कि महिला करीब तीन माह की गर्भवती थी और उसका गर्भपात हुआ है।
महिला को गर्भपात संबंधी शिकायत के बाद बुधवार देर रात अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान चिकित्सकों को गर्भाशय में प्लेसेंटा (नाल) फंसे होने की स्थिति मिली। इसे चिकित्सकीय भाषा में रिटेन्ड प्लेसेंटा कहा जाता है।
चिकित्सकों को बरामद भ्रूण के आकार और वजन को देखकर संदेह हुआ। करीब 1.7 किलोग्राम वजन के भ्रूण की अवधि लगभग सात माह आंकी गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले की पड़ताल शुरू की।
बताया जा रहा है कि महिला का प्रसव कहीं अन्य स्थान पर हुआ था और वह अस्पताल में नाल संबंधी समस्या के उपचार के लिए पहुंची थी। हालांकि, महिला ने डस्टबिन में मिले भ्रूण को अपना मानने से इनकार कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रतीश शुक्ला ने पोस्टमार्टम के दौरान भ्रूण की फीमर बोन का नमूना सुरक्षित किया। संदिग्ध महिला का रक्त नमूना भी लिया गया है।
डीएनए मिलान के जरिए दोनों के बीच जैविक संबंध की पुष्टि की जाएगी। पोस्टमार्टम के बाद भ्रूण को अस्पताल की मदद से नगर निगम के माध्यम से दफना दिया गया।
महिला फिलहाल जिला अस्पताल के पोस्टनेटल केयर (पीएनसी) वार्ड में भर्ती है। उसके पति ने अस्पताल प्रबंधन से छुट्टी देने की मांग की, लेकिन मामले की जांच और चिकित्सकीय परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल उसे डिस्चार्ज नहीं किया गया है।
अस्पताल प्रबंधन ने घटना की सूचना सिटी कोतवाली पुलिस को दी है। साथ ही अस्पताल स्तर पर भी आंतरिक जांच के निर्देश दिए गए हैं। अब इस पूरे मामले में डीएनए रिपोर्ट निर्णायक साबित हो सकती है।
रिपोर्ट से न केवल भ्रूण की जैविक मां की पहचान हो सकेगी, बल्कि सीसीटीवी में दिखाई दी गतिविधियों और अस्पताल में भर्ती महिला के बीच संबंध को लेकर उठ रहे सवालों की भी पुष्टि या खंडन हो सकेगा।
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