
शिवम कृष्ण त्रिपाठी, नईदुनिया, चित्रकूट। मंगलवार से अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का आगाज होगा। राघव प्रयाग घाट पर 19 अक्टूबर तक चलने वाले सात दिवसीय आयोजन में भारत सहित विदेशों की रामलीला और पारंपरिक कला शैलियों के जरिए प्रभु श्रीराम के जीवन-चरित्र, आदर्शों और रामकथा की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का मंचन किया जाएगा।
पहले दिन थाईलैंड का ‘श्री रामाकेन दल’ यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल खोन नृत्य शैली के माध्यम से श्रीराम जन्म और बाल लीला की प्रस्तुति देगा।
उत्सव में रूस के मास्को से आए ‘दिशा रामलीला’ दल के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कलाकार भी अपनी पारंपरिक मंचन शैलियों में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत करेंगे।
मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास और वीर भारत न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से प्रस्तुतियां होंगी। आयोजन विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन की देखरेख में किया जा रहा है।
पहले दिन श्रीराम जन्म, विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। थाईलैंड की पारंपरिक खोन नृत्य शैली इस प्रस्तुति का प्रमुख आकर्षण रहेगी।
रूस के मास्को का ‘दिशा रामलीला’ दल रावण वध और श्रीरामराज्य जैसे प्रसंग प्रस्तुत करेगा। आंध्र प्रदेश के कलाकार यक्षगान शैली में सीता स्वयंवर और तेलंगाना के कलाकार चंडू भागवतम् शैली में सीता हरण का मंचन करेंगे।
थाईलैंड में प्रचलित रामकथा परंपरा में भगवान श्रीराम के चरित्र की विशिष्ट सांस्कृतिक अभिव्यक्ति देखने को मिलेगी। कलाकारों की प्रस्तुतियों के भाव और प्रसंग दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अनुवादक की व्यवस्था रहेगी।
13 से 19 अक्टूबर तक राघव प्रयाग घाट पर प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से कार्यक्रम होंगे। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली का आयोजन में विशेष सहयोग रहेगा।
यह भी पढ़ें- एमपी में है ऐसा मंदिर जिसकी पहचान भक्त के नाम से, यहां विराजी हैं सिंधिया राजघराने की कुलदेवी