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चित्रकूट में थाईलैंड की रामायण का मंचन, 15 मिनट की प्रस्तुति में थाई संस्कृति की झलक; देखें फोटो

इस प्रस्तुति में पारंपरिक मुखौटों, वेशभूषा, नृत्य और अभिनय के जरिए रामकथा को थाई सांस्कृतिक शैली में प्रस्तुत किया गया।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 10:54:06 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 10:54:06 PM (IST)
चित्रकूट में थाईलैंड की रामायण का मंचन, 15 मिनट की प्रस्तुति में थाई संस्कृति की झलक; देखें फोटो
स्वर्ण मृग प्रसंग, सीता हरण और भगवान श्रीराम-रावण युद्ध का मंचन करते थाई कलाकार। नईदुनिया

HighLights

  1. श्रीरामलीला उत्सव में अलग-अलग शैलियों में प्रस्तुतियां
  2. पारंपरिक खोन नृत्य-नाटिका के माध्यम से युद्ध का मंचन
  3. श्री राम को थाईलैंड में नायक के रूप में जाना जाता है

शिवम कृर्ष्‍ण त्रिपाठी, नईदुनिया, सतना। थाईलैंड की रामायण ‘रामाकियन’ और भारतीय रामकथा के प्रसंग मंगलवार को सतना जिले के चित्रकूट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के मंच पर एक साथ नजर आए।

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पारंपरिक खोन नृत्य-नाटिका के माध्यम से युद्ध का मंचन

थाईलैंड के कलाकारों ने पारंपरिक खोन नृत्य-नाटिका के माध्यम से स्वर्ण मृग प्रसंग, सीता हरण और भगवान श्रीराम-रावण युद्ध का मंचन किया।

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रामकथा के वैश्विक स्वरूप से परिचित कराना है उद्देश्य

संस्कृति विभाग की पहल पर आयोजित इस उत्सव में विदेशी रामायण परंपराओं को शामिल करने का उद्देश्य दर्शकों को रामकथा के वैश्विक स्वरूप से परिचित कराना है। उतने ही आतुर दिखे दर्शक जिन्हें यह जानने की विशेष जिज्ञासा रही कि आखिर प्रभु श्री राम को थाईलैंड में किस रूप में जाना जाता है।

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कार्यक्रम मौजूद रहे गणमान्य नागरिक

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, अभय महाजन, सचिव, दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट नगर परिषद अध्यक्षा साधन पटेल समेत अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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भोपाल से आए कार्यक्रम समन्वयक संजय मिश्रा ने बताया कि उत्सव में भारतीय रामलीला की विविध शैलियों के साथ दूसरे देशों में प्रचलित रामायण परंपराओं की प्रस्तुतियां भी शामिल की गई हैं। थाईलैंड की प्रस्तुति इसी अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान का हिस्सा है।

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सात दिवसीय उत्सव में अलग-अलग लोकनाट्य

सात दिवसीय उत्सव में अलग-अलग लोकनाट्य शैलियों के माध्यम से रामकथा प्रस्तुत की जा रही है। थाईलैंड की खोन नृत्य-नाटिका इस आयोजन का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आकर्षण रही, जिसने रामायण की भारतीय जड़ों और थाईलैंड की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के बीच संबंध को सामने रखा।

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स्वर्ण मृग, सीता हरण और राम-रावण युद्ध का मंचन

खोन नृत्य-नाटिका में रावण के कहने पर मारीच के स्वर्ण मृग का रूप धारण करने से लेकर भगवान राम के उसके पीछे जाने तक के प्रसंग दिखाए गए। मारीच की छलपूर्वक राम की आवाज में पुकार सुनकर सीता के आग्रह पर लक्ष्मण आश्रम छोड़ते हैं।

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रावण सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया

इसी बीच साधु के वेश में पहुंचा रावण सीता का हरण कर उन्हें लंका ले जाता है। इसके बाद सीता की खोज और राम-रावण युद्ध के दृश्यों का मंचन किया गया।

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थाईलैंड की खोन शैली पारंपरिक मुखौटा नृत्य-नाट्य कला

थाईलैंड की खोन शैली पारंपरिक मुखौटा नृत्य-नाट्य कला है, जिसमें संगीत, अभिनय, शारीरिक मुद्राओं और विशिष्ट वेशभूषा के जरिए कथा प्रस्तुत की जाती है। यूनेस्को ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है। थाईलैंड में रामाकियन वहां की सांस्कृतिक पहचान और कलात्मक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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19 अक्टूबर तक प्रतिदिन होंगी रामलीला की प्रस्तुतियां

  • 13 अक्टूबर: थाईलैंड की खोन नृत्य-नाटिका में स्वर्ण मृग, सीता हरण और राम-रावण युद्ध। श्रीराम जन्म एवं बाल लीला का मंचन भी निर्धारित।
  • 14 अक्टूबर: यक्षगान शैली में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, सीता स्वयंवर और राम-रावण युद्ध के प्रसंग।
  • 15 अक्टूबर: कैकेयी के वरदान, श्रीराम का वनगमन, वन जीवन और भरत मिलाप।
  • 16 अक्टूबर: चंडू भागवत शैली सहित सीता हरण, श्रीराम-सुग्रीव मिलन और सुग्रीव-हनुमान संवाद।
  • 17 अक्टूबर: हनुमान का लंका प्रवेश, बालि वध, सुग्रीव का राज्याभिषेक और हनुमान भक्ति के प्रसंग।
  • 18 अक्टूबर: रामचरितमानस के लंका कांड से जुड़े प्रसंग, लक्ष्मण मूर्छा और संजीवनी बूटी।
  • 19 अक्टूबर: सीता स्वयंवर, श्रीराम की अयोध्या वापसी, सीता हरण और राम-रावण युद्ध सहित रामकथा के विविध प्रसंग।

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