
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। जिले के मझगवां विकासखण्ड अंतर्गत आने वाले चित्रकूट नगर परिषद क्षेत्र में के वार्ड 13 में शामिल थरपहाड़ गांव में सड़क की बदहाली अब ग्रामीणों के लिए बीमारी से भी बड़ी मुसीबत बनी हुई है।
गांव तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क नहीं होने का खामियाजा शुक्रवार को 28 वर्षीय गोरे सिंह पिता बब्बू सिंह और उनके परिवार को भुगतना पड़ा। अचानक उल्टी-दस्त के कारण हालत बिगड़ने पर परिजनों और ग्रामीणों को उन्हें झोली में बांधकर कंधे पर उठाना पड़ा।
मुख्य मार्ग तक पहुंचने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार और दवा के बाद जब उन्हें वापस गांव लाया गया, तब भी कंधे का ही सहारा लेना पड़ा। यह तस्वीर केवल एक मरीज की मजबूरी नहीं, बल्कि थरपहाड़ के ग्रामीणों की रोजमर्रा की समस्या को सामने लाती है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में जब भी कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ती है या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है, तो सबसे पहले सड़क का संकट सामने खड़ा हो जाता है। वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते और लोगों को मरीज को उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
बारिश के दौरान गांव की समस्या और गंभीर हो जाती है। रास्ते में कीचड़ और जलभराव के कारण पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बीमार व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने से आपात स्थिति में उपचार मिलने में भी देरी का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर जिम्मेदारों के दावों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से सड़क निर्माण के लिए टेंडर होने और जल्द काम शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन मौके पर अब तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ। न निर्माण एजेंसी का काम दिखाई दे रहा है और न सड़क निर्माण की गतिविधि।
ग्रामीणों के अनुसार नगर परिषद और प्रशासनिक अधिकारियों से सड़क की स्थिति पर सवाल करने पर कभी भोपाल स्तर पर स्वीकृति लंबित होने की बात कही जाती है तो कभी प्रक्रिया पूरी होने का आश्वासन दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आश्वासन सुन रहे हैं, अब उन्हें सिर्फ सड़क चाहिए।
हाइलाइट : थरपहाड़ की हकीकत
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