
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। विंध्य अंचल के किसानों का दशकों पुराना सपना अब साकार होने की दहलीज पर है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में विंध्य पर्वतमाला के भीतर निर्मित करीब 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी ग्रेविटी फ्लो (गुरुत्वाकर्षण आधारित) जल सुरंग अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि इसी वर्ष इसका संचालन शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही नर्मदा का पानी पहली बार बड़े पैमाने पर सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के सूखे खेतों तक पहुंचेगा।
यह परियोजना केवल सिंचाई योजना नहीं, बल्कि विंध्य के कृषि, पेयजल, भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली विकास गाथा बन रही है। करीब 17 वर्षों की इंजीनियरिंग चुनौती के बाद तैयार हुई यह सुरंग विंध्य पर्वतमाला को चीरते हुए बरगी बांध का पानी प्राकृतिक ढाल के सहारे सोन बेसिन तक पहुंचाएगी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पानी को उठाने के लिए किसी पंप की आवश्यकता नहीं होगी। पूरी प्रणाली गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिससे ऊर्जा की बचत भी होगी और संचालन लागत भी कम रहेगी।
यह परियोजना केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि विंध्य के कृषि इतिहास का नया अध्याय है। यदि वितरण नहरों का काम भी समय पर पूरा हुआ तो आने वाले वर्षों में सतना, मैहर, रीवा और पन्ना को लंबे समय तक जल संकट और वर्षा आधारित खेती की समस्या से बड़ी राहत मिल सकती है।
उल्लेखनीय है कि स्लीमनाबाद जल सुरंग परियोजना वर्ष 2008-09 में शुरू हुई थी। प्रारंभिक लक्ष्य कुछ वर्षों में इसे पूरा करने का था, लेकिन विंध्य पर्वतमाला की जटिल भूगर्भीय संरचना, कठोर चट्टानें, कई स्थानों पर अत्यधिक जल रिसाव, डिजाइन में बदलाव, भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक विलंब के कारण निर्माण लगातार प्रभावित होता रहा। बीच-बीच में ठेकेदारी संबंधी समस्याएं और तकनीकी संशोधन भी हुए। परिणामस्वरूप परियोजना को पूरा होने में लगभग 17 वर्ष लग गए। परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग 799 करोड़ थी। लंबे समय तक निर्माण खिंचने के कारण वर्तमान लागत बढ़कर लगभग 1,600 करोड़ तक पहुंच गई।
परियोजना से कुल 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसका सबसे अधिक लाभ सतना और मैहर को मिलेगा। जिसमें सतना जिला का 1,04,970 हेक्टेयर क्षेत्र, मैहर का 54,227 हेक्टेयर क्षेत्र सिचिंत होगा। इसी प्रकार कटनी जिला का 21,823 हेक्टेयर, रीवा जिला का 3,084 हेक्टेयर एवं पन्ना जिला का 448 हेक्टेयर क्षेत्र सिचिंत होगा। यानी केवल सतना और मैहर में ही लगभग 1.59 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी।
इससे धान, गेहूं, चना, मसूर, सरसों तथा बागवानी फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद है। परियोजना के पूरा होने पर जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांव लाभान्वित होंगे। इनमें बड़ी संख्या उन गांवों की है, जहां आज भी खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। सिंचाई सुविधा मिलने के बाद किसान साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरंग निर्माण सबसे कठिन चरण था, लेकिन परियोजना की वास्तविक सफलता वितरण नहरों के समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगी। मुख्य नहर और शाखा नहरों का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है, जबकि कई क्षेत्रों में वितरण नहरों का कार्य अंतिम चरण में है। इन्हीं नहरों के माध्यम से पानी गांव और खेत तक पहुंचेगा।
यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। नहरों में नियमित जल प्रवाह से आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ेगा। कुएं, हैंडपंप और ट्यूबवेल रिचार्ज होंगे। इससे सतना, मैहर और रीवा के अनेक ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दौरान पेयजल संकट कम होने की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सिंचाई बढ़ने से फसल उत्पादन, डेयरी, बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को भी गति मिलेगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन में कमी आएगी। विंध्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
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