सतना वनमंडल की मझगवां रेंज में बीते 9-10 सालों में बढ़ी बाघों की संख्या के बाद पहली बार होगी गणना
टाइगर रिजर्व क्षेत्रों के अलावा टेरिटोरियल क्षेत्रों में भी बाघों की गणना की शुरुआत सतना वन मंडल के मझगवां वन परिक्षेत्र से हो रही है।
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 10:54:03 PM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 10:54:03 PM (IST)
HighLights
- धुबरी टाइगर रिजर्व को पत्र लिखकर करीब 150 ट्रैप कैमरे मांगे
- रेंजर वनकर्मियों की बैठक लेकर उन्हें दिशानिर्देश देंगे
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। टाइगर रिजर्व क्षेत्रों के अलावा टेरिटोरियल क्षेत्रों में भी बाघों की गणना की शुरुआत सतना वन मंडल के मझगवां वन परिक्षेत्र से हो रही है। इस गणना को रेंजर अपने स्तर पर करा रहे हैं। सतना वनमंडल की मझगवां रेंज में बीते नौ-10 सालों में बढ़ी बाघों की संख्या के बाद पहली बार गणना की शुरुआत होगी।
मझगवां रेंज के वनपरिक्षेत्र अधिकारी रंजन सिंह परिहार ने बताया कि टाइगर रिजर्व से हटकर टेरिटोरियल क्षेत्र में ऐसा प्रयोग प्रदेश में पहली बार होगा। इसके लिए अलग से किसी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
धुबरी टाइगर रिजर्व को पत्र लिखकर करीब 150 ट्रैप कैमरे मांगे
डीएफओ मयंक चांदीवाल ने बताया कि संजय धुबरी टाइगर रिजर्व को पत्र लिखकर करीब 150 ट्रैप कैमरे मांगे गए हैं। इन्हें मझगवां वनपरिक्षेत्र के शरभंगा वनक्षेत्र व अन्य जंगल एरिया में लगाया जाएगा। इन्हें ऐसे वन क्षेत्रों में लगाया जाएगा, जहां पूर्व में सर्वाधिक बाघ दिखे हैं या कैमरे में ट्रैप हो चुके हैं।
रेंजर वनकर्मियों की बैठक लेकर उन्हें दिशानिर्देश देंगे
रेंजर आगामी एक व दो नवंबर को वनकर्मियों की बैठक लेकर उन्हें दिशानिर्देश देंगे। रेंजर परिहार ने बताया कि टेरेटरी किसी वन्यजीव का अपना निश्चित या उपयोग में लिया जाने वाला क्षेत्र होता है। वन्यजीव यहां रहकर भोजन तलाशते हैं, प्रजनन करते हैं और अपने क्षेत्र का बचाव करते हैं।
वन्यजीवों की टेरेटरी प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। मझगवां रेंज के जंगल में करीब 20-25 बाघ हैं। शरभंगा के जंगल में भी बाघ दिखाई देते हैं।
गणना से क्या यह होगा लाभ
बाहरी वन क्षेत्रों में भी नियमित निगरानी और कैमरा ट्रैप के जरिए बाघों की मौजूदगी का आकलन करने से उनकी संख्या, आवाजाही और संभावित रहवास क्षेत्रों की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। मझगवां रेंज में प्रस्तावित यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे टाइगर रिजर्व के बाहर विचरण करने वाले बाघों की निगरानी को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
वन विभाग को बाघों के संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान और आवश्यक सुरक्षा उपायों की योजना बनाने में भी सहूलियत होगी।