
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। गश्त के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने बालू लोड कर ले जाते ट्रैक्टर-ट्राॅली को पकड़ा है। देर रात वन विभाग का अमला अपनी रुटीन गश्त में था।
वन अमला जैसे ही पिपरीटोला बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 870 पहुंचता है तो पाता है कि एक ट्रैक्टर-ट्राॅली से जंगल के अंदर से वनभूमि खोदकर रेत निकालकर ट्रैक्टर लोड कर रहा है। वनपरिक्षेत्राधिकारी रंजन सिंह परिहार के निर्देशन पर ट्रैक्टर-ट्राॅली को जब्त कर वनपरिक्षेत्राधिकारी कार्यालय में खड़ा करा दिया है।
वन विभाग के मुताबिक ट्रैक्टर मालिक अर्जुन प्रजापति ही वालू ला जा रहा था। विभाग ने जब ट्रैक्टर पकड़ा उस वक्त उसमें कोई भी नंबर नहीं डला हुआ था, बिना नंबर प्लेट के ही बालू ढोई जा रही थी।
रेंजर रंजन सिंह परिहार ने बताया कि अब ट्रैक्टर व ट्राली को राजसात करने की कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार कर आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल कार्रवाई करते हुए पीओआर काटा गया है।
देर रात करीब दो बजे के आस-पास वनभूमि से अवैध उत्खनन कर बालू ढोते हुए वन विभाग ने जैसे ट्रैक्टर-ट्राॅली जब्त करने की कार्रवाई शुरु की। वैसे ही अर्जुन श्रीवास्तव सामने आया और उसने बताया कि ट्रैक्टर वही चला रहा था।
ड्राइवर अर्जुन के मुताबिक वह घर बनवा रहा है और इसके लिए उसे बालू की अति आवश्यकता है। इस समय बालू महंगी होने की वजह से देर रात चुपके से जंगल के अंदर से जमीन खोदकर बालू एकत्र कर रहा था। जिसका उपयोग वह अपना मकान निर्माण कराने में करेंगे।
वन विभाग ने स्पष्ट करते हुए बताया कि वनभूमि से किसी भी प्रकार का खनन प्रतिबंधित है। लिहाजा ट्रैक्टर व ट्राली में लोड बालू समेत जब्त करते हुए प्रकरण कायम होगा। जिसके बाद वन अमला ट्रैक्टर व ट्राॅली को सुरक्षित रेंज कार्यालय में खड़ा करा दिया गया।
वन विभाग व स्थानीय लोगों की मानें तो मझगवां रेंज की अधिकतर वनभूमि रेतीली है। तेज व मूसलाधार बारिश की वजह से मिटटी सतह के नीचे बैठ जाती है और बालू ऊपर आ जाती है। लोग जिसे खोदकर इसी बालू का इस्तेमाल नदी की बालू की जगह भी करते हैं।
इस प्रकार बालू उत्खननित कर उसे बड़ी मात्रा में एकत्र करने का काम किया जाता है। जिसे बाद महंगें दामों पर बेचकर मुनाफा भी कमाया जाता है। लेकिन इस पर खनिज विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता है।
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