
अखलेश गुप्ताl नवदुनिया सीहोर। सीप नदी का पानी कोलार डैम तक लाकर भोपाल-सीहोर को पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी पहुंचाने की सीप-कोलार लिंक परियोजना अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी की मिसाल बनती दिख रही है। 137 करोड़ की परियोजना पर 160 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन अब तक सीप नदी का एक बूंद पानी भी कोलार तक नहीं पहुंचा। इछावर के खेरी गांव से निकली सीप एक स्थानीय नदी है। यह भैरुंदा, नसरुल्लागंज इलाकों से बहते हुए हुए नर्मदा मे मिल जाती है।
करीब 20 साल पहले इस नदी के अतिरिक्त पानी को कोलार में लाने की योजना पर काम शुरू हुआ। तय हुआ कि नदी के पानी को बांध से रोककर कलियादेव नाले तक लाया जाए। यहां एक बांध बनाकर इसे घोड़ापछाड़ नाले तक और वहां से तीनों नदी-नालों के पानी को नहर और भूमिगत सुरंगों के जरिए कोलार जलाशय तक पहुंचा दिया जाए। इससे स्थानीय नदी में बरसाती बाढ़ से नुकसान का खतरा टलेगा, वहीं कोलार डैम को 35 अरब लीटर पानी अतिरिक्त मिल जाएगा, जो भोपाल और सीहोर की सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। 2012 में परियोजना पर काम शुरू हुआ, जिसे 2015 में पूरा हो जाना था।
तत्कालीन सरकार ने परियोजना का ठेका कोस्टल प्राइवेट लिमिटेड व माय राइट्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया था। घटिया सामग्री, कमजोर योजना और बिना निगरानी के निर्माण ने पूरा खेल बिगाड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सीमेंट-रेत-गिट्टी इस्तेमाल की गई। यही नहीं निरीक्षण के नाम पर अधिकारियों ने कागज़ों में गुणवत्ता दर्ज कर दी, जबकि ज़मीन पर कुछ और ही चलता रहा।
नतीजा यह हुआ कि जनता के टैक्स का पैसा डैम की दरारों में समाता गया और पानी कभी लोगों तक पहुंचा ही नहीं। 2020 में जैसे-तैसे योजना पूरी हुई और पहली टेस्टिंग में ही इसकी मुख्य नहर टूट गई। इस असफलता के बाद सरकार ने दोनों कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया। नहर की मरम्मत के लिए 23 करोड़ 35 लाख रुपये का टेंडर दिया गया। 18 माह में इसे ठीक करना था, लेकिन यह काम अब तक नहीं हो पाया है।
इछावर के तत्कालीन एसडीएम विष्णु प्रसाद यादव ने साइट का निरीक्षण किया तो असलियत सामने आ गई थी। साइट इंजीनियर ने दावा किया कि 45–55 ग्रेड की उच्च गुणवत्ता वाली सीमेंट लग रही है, जबकि मौके पर 34 ग्रेड की खराब गुणवत्ता वाली सीमेंट का इस्तेमाल पाया गया था।
सीप नदी का पानी कोलार जलाशय तक पहुंचाने के लिए यह परियोजना बनी है। टेस्टिंग के दौरान इसकी नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसका निर्माण करने वाली दोनों कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था, वहीं इसकी मरम्मत के लिए तीसरी कंपनी को काम दिया था। यह काम अगले एक महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसे शुरू कर दिया जाएगा। - शुभम अग्रवाल, ईई जल संसाधन विभाग सीहोर