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सीहोर में हजारों एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, NGT ने लिया संज्ञान; 5 विभागों को नोटिस, होगी जांच

सीहोर जिले में कथित तौर पर हजारों एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जे, पेड़ों की कटाई और जंगलों को कृषि भूमि में बदलने के आरोपों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने जांच के आदेश दिए हैं।

By anuj mainaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 11:12:03 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 11:12:03 PM (IST)
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सीहोर में हजारों एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, NGT ने लिया संज्ञान; 5 विभागों को नोटिस, होगी जांच
वन महकमे की मिलीभगत पर एनजीटी का शिकंजा।

HighLights

  1. वन महकमे की मिलीभगत पर एनजीटी का शिकंजा
  2. सीहोर में वन भूमि अतिक्रमण की मौके पर होगी जांच
  3. भोपाल कोर्ट के सामने पेड़ कटाई पर भी NGT सख्त

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सीहोर जिले में कथित तौर पर हजारों एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जे, पेड़ों की कटाई और जंगलों को कृषि भूमि में बदलने के आरोपों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने जांच के आदेश दिए हैं। सेवानिवृत्त वन अधिकारियों की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकरण ने प्रदेश सरकार और वन विभाग सहित 5 प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की गई है, जो प्रभावित वन क्षेत्रों का मौके पर निरीक्षण कर शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी।

अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप

एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में सेवानिवृत्त रेंजर केएल बैरागी और सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर डॉ. एस. शाक्य ने पत्र के माध्यम से आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से पेड़ों की कटाई कर वन भूमि पर कब्जे किए जा रहे हैं। जंगल साफ कर जमीन को खेती में बदला जा रहा है और बाद में लाखों रुपये में उसका कब्जा दूसरों को सौंपा जा रहा है।


अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी

कुछ वनकर्मियों के दशकों से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने और उनकी भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। इस पर अधिकरण ने जांच के लिए समिति बनाई है, जिसमें मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीहोर डीएफओ और कलेक्टर के प्रतिनिधि शामिल होंगे। वहीं, प्रदेश सरकार के वन विभाग के प्रमुख सचिव, पीसीसीएफ, सीहोर डीएफओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और कलेक्टर को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।

समिति इन चार बिंदुओं पर करेगी जांच

  • प्रभावित वन क्षेत्रों में कहां-कहां और कितने पेड़ों की अवैध कटाई हुई है, इसका सीमांकन और सत्यापन किया जाएगा।
  • वन भूमि पर अतिक्रमण का क्षेत्रफल, उसकी प्रकृति और उसे कृषि या निजी उपयोग की जमीन में बदलने की स्थिति जांची जाएगी।
  • पहले की गई शिकायतों की स्थिति और उनमें जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा जुटाया जाएगा।
  • स्थानीय पारिस्थितिकी, वनस्पतियों और वन्यजीवों को हुए नुकसान का आकलन कर उनके पुनरुद्धार के उपाय सुझाए जाएंगे।

जिला कोर्ट के सामने पेड़ों की कटाई पर एनजीटी सख्त, पांच विभागों को नोटिस

इधर, भोपाल में जिला न्यायालय के सामने पेड़ों की कटाई और निर्माण गतिविधियों को लेकर मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्ती दिखाई है। इस मामले को लेकर नवदुनिया ने 30 सितंबर को 'ये कैसा विकास, हरे-भरे जंगल को उजाड़कर बना दिया मैदान' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।

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इस पर अधिकरण ने स्वतः संज्ञान लेकर एनजीटी बार एसोसिएशन के सचिव के पत्र पर पहले से चल रही कार्रवाई में जोड़ लिया है। इसमें अधिकरण ने पेड़ों की कटाई को लेकर प्रदेश सरकार सहित पांच विभागों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएफओ को निर्देश दिए हैं कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना कोई पेड़ न काटा जाए।

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