
नवदुनिया न्यूज, सीहोर, कोठरी। एक ओर फंदा टोल से जुड़ी लापरवाहियों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था, वहीं दूसरी ओर 18 जनवरी रविवार को ही भीम आर्मी के बड़े आंदोलन के दौरान टोल प्रशासन की मनमानी ने एक बार फिर जनसुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आंदोलन के चलते पहले से ही शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव अत्यधिक था, लेकिन ऐसे संवेदनशील समय में भी रोड मेंटेनेंस के नाम पर सड़क को वन-वे बनाए रखना प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करता है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि सूत्रों के अनुसार टोल प्रबंधन द्वारा पुलिस प्रशासन या जिला प्रशासन को सड़क को वन-वे किए जाने संबंधी कोई लिखित सूचना या अनुमति पत्र तक नहीं दिया गया। सवाल यह उठता है कि बिना प्रशासनिक मंजूरी के सड़क व्यवस्था में बदलाव करने का अधिकार टोल प्रबंधन को किसने दिया? क्या टोल प्रबंधन स्वयं को कानून और प्रशासन से ऊपर समझने लगा है?
आंदोलन के कारण लसूडिया जोड़ से लेकर टोल तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालात ऐसे बन गए कि एंबुलेंस, आपात सेवाओं के वाहन और आम नागरिक जाम में फंसे रहे। कई जगहों पर लोग घंटों तक जाम में परेशान होते रहे। यदि इस दौरान कोई बड़ा हादसा या चिकित्सीय आपात स्थिति उत्पन्न हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या टोल प्रबंधन ऐसी किसी अप्रिय घटना की जवाबदेही स्वीकार करता, या फिर मामला कागजी कार्रवाई में दबा दिया जाता?
विडंबना यह रही कि पुलिस प्रशासन आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सड़कों को क्लियर कराने में पूरी मुस्तैदी से जुटा रहा, वहीं टोल प्रशासन ने यातायात सुगमता और जनसुरक्षा के बजाय केवल टोल वसूली को ही प्राथमिकता दी। आमजन के बीच यह संदेश गया कि 'लोग मरें तो मरें, लेकिन टोल वसूली नहीं रुकनी चाहिए।'
यह मामला केवल अव्यवस्था का नहीं, बल्कि जवाबदेही और नियमों के उल्लंघन का भी है। सवाल यह भी है कि क्या आंदोलन या आपात परिस्थितियों में सड़क को वन-वे करना संचालन नियमों के अनुरूप है? क्या बिना पुलिस और प्रशासनिक समन्वय के सड़क व्यवस्था बदलना कानूनन अपराध की श्रेणी में नहीं आता?
जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और गृह विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। यह स्पष्ट किया जाए कि किसके आदेश पर सड़क को वन-वे किया गया, अनुमति क्यों नहीं ली गई और इससे जनता को हुई परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा। साथ ही दोषी अधिकारियों और टोल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी मनमानी पर रोक लगाई जाए, ताकि आंदोलन या आपात हालात में आमजन की जान जोखिम में न पड़े।
मुझे इस संबंध में जानकारी नहीं मिली है। यदि बिना सूचना के इंदौर भोपाल राज्य राजमार्ग पर मेंटेनेंस कर वन-वे किया गया है और उसके कारण जाम लग रहा है तो मैं अभी दिखवा लेता हूं। - दीपक कुमार शुक्ला, एसपी सीहोर