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सीहोर के लाल कपिल परमार ने एशियन पैरा गेम्स में जीता कांस्य पदक, मां ने खेतों में मजदूरी कर पाला

सीहोर के कपिल परमार ने एशियन पैरा गेम्स (जापान) के पैरा जूडो में कांस्य पदक जीता है। बचपन में करंट लगने से घायल कपिल को उनकी मां ने मजदूरी करके पाला ह...और पढ़ें

By Akhilesh GuptaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 02:01:15 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 02:14:52 PM (IST)
सीहोर के लाल कपिल परमार ने एशियन पैरा गेम्स में जीता कांस्य पदक, मां ने खेतों में मजदूरी कर पाला
कपिल परमार ने एशियन पैरा गेम्स में जीता कांस्य पदक। (नईदुनिया)

HighLights

  1. कपिल परमार ने एशियन पैरा गेम्स में जीता कांस्य।
  2. इंडोनेशिया के खिलाड़ी को 69 सेकंड में हराया।
  3. बचपन में करंट लगने के बाद कोमा में थे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में सीहोर के प्रतिभाशाली पैरा जूडो खिलाड़ी कपिल परमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। कपिल ने पुरुषों की जे-1 70 किग्रा भार वर्ग स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया।

कांस्य पदक के निर्णायक मुकाबले में विश्व रैंकिंग में आठवें नंबर के कपिल ने इंडोनेशिया के 17वीं रैंकिंग वाले खिलाड़ी राफली अहनाफ शिदकी को महज 1 मिनट 9 सेकंड (69 सेकंड) में 'इप्पोन' दांव के जरिए शिकस्त देकर पोडियम पर जगह बनाई। इससे पहले क्वार्टर फाइनल में उन्होंने मंगोलिया के बातरसुरेन बात-एर्देने को कड़े संघर्ष के बाद हराया था। हालांकि सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के जुनैदी से हार के बाद उनका स्वर्ण पदक का सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कांस्य जीतकर देश को गौरवान्वित किया।


​'स्वर्ण जीतने आया था, पर कांस्य के लिए भी आभारी हूं'

मुकाबला जीतने के बाद कपिल भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "मैं यहां स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से आया था, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। इसके बावजूद मैं इस कांस्य पदक के लिए आभारी हूं।' कपिल वर्ष 2017 से लगातार पैरा-जूडो स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वे अपने मुख्य कोच मुनव्वर अंजार अली सिद्दीकी के मार्गदर्शन में नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

​बचपन में लगा था करंट, कोमा में रहे थे कपिल

कपिल की इस उपलब्धि के पीछे कड़े संघर्ष और दर्द की कहानी है। जब वे करीब 10-12 साल के थे, तब खेत में पानी पीने के दौरान उन्हें तेज बिजली का करंट लग गया था। हादसे के बाद वे कोमा में चले गए थे। उस समय पिता घर पर मौजूद नहीं थे, तब परिचित गजराज और वकील साहब उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। रात को ड्रिप लगने के बाद उन्हें होश आया था। इस हादसे में उनकी आंखों की रोशनी पर गंभीर असर पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

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दूसरों के खेतों में सोयाबीन काटी, कंडे थापे : मां

कपिल की ऐतिहासिक जीत के बाद सीहोर स्थित उनके घर में जश्न का माहौल है। उनकी मां धनकुंवरबाई रामसिंह परमार ने बच्चों और पड़ोसियों को मिठाई बांटकर खुशी जताई। भावुक मां ने कहा, "बेटे के लिए जो संघर्ष किया है, उसे बयां नहीं कर सकती। दूसरों के यहां मजदूरी की, खेतों में सोयाबीन काटी और कंडे (उपले) थाप-थापकर बेटे को पाला-पोसा। आज बेटे की इस सफलता पर मुझे बहुत गर्व है। मैं शब्दों में नहीं बता सकती कि अंदर से कितनी खुश हूँ।'

​मंत्री विश्वास सारंग ने दी बधाई

कपिल की जीत पर खेल प्रेमियों सहित प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बधाई दी। उन्होंने लिखा कि मध्य प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी कपिल परमार ने पैरा जूडो में कांस्य पदक जीतकर संपूर्ण देश व प्रदेश का मान बढ़ाया है।

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