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सीहोर में 5 दिन के धरने के बाद आदिवासी आज करेंगे भोपाल कूच, CM आवास तक पैदल मार्च

कोसमी में वन विकास निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों ने पांच दिन से जारी धरना खत्म नहीं किया। उन्होंने पैदल मार्च कर मुख्यमंत्री...और पढ़ें

By Akhilesh GuptaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 08:25:22 AM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 08:37:32 AM (IST)
सीहोर में 5 दिन के धरने के बाद आदिवासी आज करेंगे भोपाल कूच, CM आवास तक पैदल मार्च
कोसमी डिपो परिसर में धरने पर बैठे आदिवासी परिवार। नईदुनिया।

HighLights

  1. कोसमी में वन विकास निगम ने हटाया अतिक्रमण
  2. गुरुवार को भोपाल कूच करेंगे प्रभावित आदिवासी
  3. पैदल मार्च कर मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचने की घोषणा

नईदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर । बुदनी क्षेत्र के कोसमी में वन विकास निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जद में आए आदिवासी परिवार बुधवार को भी धरने पर बैठे रहे। संभाग आयुक्त और कलेक्टर ने उनको समझाने की कोशिश की, लेकिन वे धरना खत्म करने का तैयार नहीं।

प्रभावित परिवारों ने गुरुवार को भोपाल कूच की घोषणा की है। उनका कहना है कि वे पैदल मार्च कर मुख्यमंत्री निवास तक जाएंगे जहां वे अपनी बात रखेंगे।

बेनतीजा रही बातचीत

संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा व कलेक्टर बालागुरू के. बुधवार को कोसमी के पंचायत भवन पहुंचे। धरने पर संदेश भेजा गया, लेकिन प्रभावित परिवारों ने पंचायत में जाने से इन्कार करते हुए कहा कि जिसे बात करनी है वह धरना स्थल पर आए।


एसडीएम और थाना प्रभारी की समझाइश के बाद दो लोग ग्राम पंचायत पहुंचे और आयुक्त और कलेक्टर के सामने अपनी बात रखी। कई दौर की चर्चा के बाद भी वे लोग धरने से हटने को तैयार नहीं हुए।

दूसरी जगह शिफ्ट करने पर विचार

संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर परिवारों और अन्य लोगों से चर्चा की गई है। सभी पक्षों के तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी, उन्होंने कहा कि अतिक्रमण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

यह भी पता किया जा रहा है कि प्रभावित परिवारों के पास रहने के लिए दूसरी जगह उपलब्ध है या वे इसी जमीन पर निर्भर हैं।

वन विभाग ने हाटाया था अतिक्रमण

बता दें कि 11 अक्टूबर को वन विकास निगम ने कोसमी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान नौ झोपड़ियां टूटीं, खेतों में लगी मक्का और अरहर की फसल नष्ट कर दी गई और पेयजल और सिंचाई के स्रोत कुएं को मिट्टी से पाट दिया गया।

वन विकास निगम का कहना है कि 2021 में यहां सागौन के पौधे लगाए गए थे। 2022 में दूसरे गांव के 12 परिवारों ने उन्हें नष्टकर जमीन पर कब्जा कर लिया। उसे खाली कराने के लिए यह कार्रवाई पर्याप्त समय और सूचना देकर की गई है।

यह भी पढ़ें- बुधनी वन क्षेत्र अतिक्रमण मामले में बड़ा खुलासा; 78 हजार सागौन के पौधे काटकर किया गया कब्जा, सीहोर कलेक्टर ने CM को सौंपी रिपोर्ट

वन अधिकारियों ने मांगी डिपो की सुरक्षा

इस बीच वन विकास निगम ने भैरुंदा थाने को पत्र लिखकर डिपो में सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। निगम का कहना है कि यह आरक्षित वन क्षेत्र का प्रतिबंधित इलाका है जिसमें अनाधिकृत व्यक्ति के घुसने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।वहां पर धरना और उसमें रोज क्षेत्र से बाहर के और दूसरे जिलों के भी लोगों का आना जाना हो रहा है।

क्षेत्रीय नेता और विधायक रोज यहां आ रहे हैं। डिपो में तीन-चार करोड़ की संपत्ति पड़ी है। कर्मचारियों के परिवार हैं, उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। एएसपी प्रशांत चौबे ने कहा कि इस संबंध में एसडीओपी से रिपोर्ट मांगी गई है। उसके आधार पर व्यवस्था होगी।