
नईदुनिया प्रतिनिधि, सिवनी। बीते पांच माह में जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 80 नवजात शिशुओं की मौत के बाद प्रभारी को हटा दिया गया है। सिवनी से भाजपा विधायक दिनेश राय ने रविवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था।
सीएमएचओ डाॅ. पंकज दुबे ने जांच दल गठित किया। जांच के बाद उन्होंने मंगलवार को एसएनसीयू का प्रभार डाॅ. पारस पटेरिया के स्थान पर शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ. विनोद दहायत को सौंपने का आदेश जारी कर दिया।
सीएमएचओ डाॅ. पंकज दुबे व सिविल सर्जन डाॅ. विनोद नावकर ने जांच की तो पता चला कि एक अप्रैल से 30 सितंबर तक एसएनसीयू में भर्ती किए गए 1088 शिशुओं में 80 की मृत्यु हुई है। इनमें से 60 शिशुओं का वजन सामान्य से कम था, जिनमें से 44 शिशु 400 से 1500 ग्राम के थे।
इन 80 मृत शिशुओं में 58 प्रिमेच्योर व 22 को जन्म के दौरान मस्तिष्क को गंभीर आक्सीजन की कमी और रक्त संचार अवरोध के कारण एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। इनमें से 39 शिशु जिला अस्पताल सिवनी में जन्मे थे। विधायक दिनेश राय मुनमुन के अनुसार एसएनसीयू वार्ड में नवजात शिशुओं की मृत्यु और देखभाल में लापरवाही की लगातार शिकायतें मिल रही थी।
बीते पांच माह में जिले के एसएनसीयू वार्ड में हुई नवजात शिशुओं की मौत मामले की जांच करने सीएमएचओ डा. पंकज दुबे ने चार सदस्यीय जांच दल गठित किया है। सीएमएचओ ने बताया कि दल में मेडिकल कालेज में सहायक प्राध्यापक और शिशु रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. गौरव प्रजापति के अलावा अन्य तीन डाक्टरों को शामिल किया गया है।
जांच दल विशेष रूप से एसएनसीयू में हुई बच्चों की मृत्यु के कारणों की गहनता से पड़ताल करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से किया गया है। उल्लेखनीय है कि विधायक दिनेश राय मुनमुन के औचक निरीक्षण व भारी नाराजगी जाहिर करने के अगले दिन रविवार को जिला अस्पताल प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अफसर घंटों छानबीन व पड़ताल में जुटे रहे।
विधायक में दौरे में पता चला कि बीते तीन माह में अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा ईकाई (एसएनसीयू) में 46 शिशुओं की मौत हुई है, जो तेजी से मीडिया में तेजी से प्रसारित हुई। शिशुओं की मौत व जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े होने लगे। इससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन भी हरकत में आया।
रविवार को सीएमएचओ डा. पंकज दुबे व सिविल सर्जन डा. विनोद नावकर की मौजूदगी में हुई छानबीन में पता चला कि इस साल 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक एसएनसीयू में भर्ती किए गए 1088 शिशुओं में 80 की मृत्यु हुई है। इनमें से 60 शिशुओं का वजन सामान्य से कम था, जिनमें से 44 शिशु 400 से 1500 ग्राम के थे।
इन 80 मृत शिशुओं में 58 प्रिमेच्योर व 22 को जन्म के दौरान मस्तिष्क को गंभीर आक्सीजन की कमी तथा रक्त संचार अवरोध के कारण एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। अप्रैल से सितंबर तक मृत हुए 80 शिशुओं में से 39 शिशु जिला अस्पताल सिवनी में जन्मे थे। इस अवधि में 582 कम वजन के शिशुओं तथा प्रिमेच्योर शिशुओं की जीवन रक्षा जिला अस्पताल के चिकित्सकों व स्टाफ के प्रयासों से हुई।
सीएमएचओ डा. पंकज दुबे ने बताया कि जिला चिकित्सालय में 5 सौ से 8 सौ प्रसव होते हैं। इनमें दूरस्थ क्षेत्र से रैफर होकर आने वाली हाईरिस्क गर्भवती भी रहती हैं। इनमें से 250 से 400 तक सीजर आपरेशन वाले प्रसव रहते हैं। मृत 80 शिशुओं में डेढ़ से 2 प्रतिशत शिशुओं की मृत्यु जन्म के पूर्व गर्भ में ही हो गई थी। सीएमएचओ व सिविल
सर्जन ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में कुल नियोनेटल डेथ (पहले 28 दिनों के भीतर) में से 48 प्रतिशत मृत्यु की वजह जन्म के समय शिशु का वजन ढाई किलो से कम का होना होता है। केंद्र सरकार व गाइड लाइन के अनुसार एसएनसीयू में शिशु मृत्यु दर 10 प्रतिशत से कम होना चाहिए।
जिला चिकित्सालय में नवजात शिशु मृत्यु दर साढ़े सात प्रतिशत से कम है और यह जबलपुर संभाग के कई अन्य जिलों के जिला अस्पतालों से भी कम है। सिविल सर्जन डा. नावकर का कहना था कि व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर गंभीरता से प्रयास होंगे। यदि किसी तरह की गड़बड़ी मिली और कोई दोषी पाया जाएगा, तो कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन के अनुसार एसएनसीयू वार्ड में नवजात शिशुओं की मृत्यु और देखभाल में लापरवाही की लगातार शिकायतें मिल रही थी, जिसके बाद वे वार्ड का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान एसएनसीयू में डाक्टर्स की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए विधायक ने सिविल सर्जन से सवाल पूछे थे। साथ ही मामले की जांच करने कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग के कमिश्नर और मुख्यमंत्री तक शिकायती पत्र भेजने की बात कही थी।
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डाॅक्टरों के अनुसार जबलपुर संभाग के अन्य जिलों के मुक़ाबले सिवनी में शिशुओं की मृत्यु दर कम है। चिकित्सा अधिकारियों के दावों के बीच 5 माह में 80 बच्चों की मौत होने से एसएनसीयू में बच्चों की देखभाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संभाग के अन्य जिलों के मुकाबले सिवनी एसएनसीयू का शिशु मृत्यु दल 8 प्रतिशत के आसपास है। जबकि मंडला शिशु मृत्यु दर 12 प्रतिशत और डिंडौरी में मृत्यु दर 10 प्रतिशत से अधिक है। खास बात यह है कि 8 अक्टूबर तक एसएनसीयू में भर्ती 1123 में से शिशुओं में से 16 प्रतिशत को गंभीर हालत में मेडिकल कालेज जबलपुर बेहतर उपचार के लिए रैफर किया गया है। जबकि संभाग के अन्य जिलों में रैफर दर 9 प्रतिशत से कम है।
दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) की स्थिति संतोषजनक है। इनमें भर्ती बच्चों की मृत्यु दर न के बराबर है। वर्तमान में जिले के लखनादौन, छपारा और घंसौर में ये इकाइयां संचालित हैं।
उन्होंने बताया कि अप्रैल से सितंबर तक के 5 माह के आंकड़ों के अनुसार लखनादौन की स्थिरीकरण इकाई में भर्ती 108 नवजातों में से केवल 2 बच्चों की मृत्यु दर्ज की गई है। छपारा में 86 और घंसौर में 84 नवजात बच्चों को भर्ती कराया गया था, जिनमें से किसी भी बच्चे की मृत्यु दर्ज नहीं हुई है, जो कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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