
नईदुनिया प्रतिनिधि, सिवनी। जिला मुख्यालय से करीब 150 किलोमीटर दूर घंसौर विकासखंड के शासकीय सीनियर बालक छात्रावास शिकारा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
छात्रावास में कक्षा 11वीं के एक छात्र के साथ शराब के नशे में धुत अधीक्षक द्वारा मारपीट किए जाने के प्रकरण में जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई करते हुए अधीक्षक अभिषेक नाग को निलंबित कर दिया गया है।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच कलेक्टर अंजू अरुण कुमार के निर्देशानुसार कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन में छात्र के साथ मारपीट किए जाने की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर द्वारा संबंधित अधीक्षक के विरुद्ध निलंबन के निर्देश दिए।
निर्देश के अनुपालन में सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, सिवनी द्वारा यह कार्रवाई की गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब 1 नवंबर को जनजातीय कार्य विभाग ने जिला मुख्यालय में छात्रावास दिवस मना रहा था।
मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सिवनी मंडला सांसद फगन सिंह कुलस्ते मौजूद थे। जबकि उनके लोकसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य घंसौर के शिकारा छात्रावास में एक छात्रा से अमानवीय तरीके से मारपीट की घटना सामने आई है।
31 अक्टूबर की रात छात्रावास में सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान थूकने जैसी मामूली बात को लेकर अधीक्षक आग बबूला हो गया। गुस्से में आकर उसने 11वीं के छात्र को पकड़ लिया और एक मोटे प्लास्टिक के पाइप से उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी।
छात्र हाथ जोड़कर लगातार माफी मांगता रहा और रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन नशे में चूर अधीक्षक का दिल नहीं पसीजा। इस अमानवीय घटना के बाद छात्र के शरीर पर पिटाई के गंभीर निशान पाए गए हैं और छात्रावास के अन्य छात्रों में भी भारी दहशत का माहौल है।
घटना की सूचना मिलते ही छात्र के परिजन देर रात ही छात्रावास पहुंच गए और अधीक्षक के कृत्यों का जमकर विरोध जताया। इसके बाद परिजनों ने घंसौर थाने पहुंचकर अधीक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही घायल छात्र को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, घंसौर में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। मामले की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया था।
जनजातीय कार्य विभाग सिवनी के सहायक आयुक्त लालजी राम मीणा ने बताया कि इस प्रकरण में जांच प्रतिवेदन के आधार पर छात्रावास अधीक्षक को निलंबित कर दिया है विस्तृत जांच व कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना ने सरकारी छात्रावासों की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन बच्चों की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी अधीक्षक के कंधों पर होती है, यदि वही इस तरह की हरकतों को अंजाम दें, तो बच्चे छात्रावासों में खुद को कैसे सुरक्षित महसूस कर पाएंगे। फिलहाल पुलिस इस मामले में प्राप्त शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी जांच कर रही है।
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