
नईदुनिया प्रतिनिधि, सिवनी। जिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान विधायक दिनेश राय ने शिकायत की कि एसएनसीयू में लापरवाही के चलते छह माह में 80 नवजात शिशुओं की मौत हो गई है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ और सिविल सर्जन का दावा है कि गंभीर स्थिति के नवजात शिशुओं की मौत का जिले में प्रतिशत राष्ट्रीय व प्रदेश के औसत से कम है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मानकों के अनुसार एसएनसीयू में भर्ती गंभीर नवजात शिशुओं में से 10 प्रतिशत की मौत होना सामान्य है। जिला अस्पताल सिवनी में बीते छह माह के दौरान 8 प्रतिशत से कम शिशुओं की मौत हुई है। व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने सीएमएचओ ने एसएनसीयू का प्रभार बदलने के साथ ही उपचार में लापरवाही की शिकायतों की जांच शुरू कर दी है।
आंकड़े बताते है कि सिवनी अस्पताल में शिशुओं की मौत के प्रतिशत की तुलना जबलपुर संभाग के जिलों से की जाए, तो इसी छह माह की अवधि में मंडला में 12 प्रतिशत और डिडौंरी में 10.02 प्रतिशत नवजात शिशुओं ने दम तोड़ा है।
संभागीय मुख्यालय जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल काॅलेज में सर्वाधिक 16 प्रतिशत शिशुओं की मौत दर्ज हुई है। बालाघाट में मात्र छह प्रतिशत नवजात शिशुओं की मौत दर्ज हुई है। इसके अलावा छिंदवाड़ा, कटनी में नौ-नौ प्रतिशत शिशुओं की मौत हुई है। सिवनी और नरसिंहपुर में आठ-आठ प्रतिशत शिशुओं की मौत उपचार के दौरान हुई है।
जानकारों के अनुसार संभाग के सभी जिलों से एसएनसीयू से अतिगंभीर नवजात शिशुओं को मेडिकल कालेज जबलपुर रेफर किया जाता है, जिनकी जान बचाना मुश्किल होता है। सिवनी अस्पताल में भर्ती हुए शिशुओं में भर्ती हुए 1088 शिशुओं में से 16 प्रतिशत को जबलपुर मेडिकल कालेज रेफर किया है, जो संभाग के दूसरे जिलों की तुलना में सबसे ज्यादा है।
शिशुओं को अधिक संख्या में रेफर करने के मामले में भी स्वास्थ्य अधिकारी छानबीन कर रहे हैं। सिवनी से अधिक संख्या में शिशुओं के रैफर होने के मामले में लापरवाही सामने आने पर वार्ड के संबंध डाक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है। गौरतलब है कि सिवनी जिला अस्पताल में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक एसएनसीयू में भर्ती किए गए 1088 शिशुओं में 80 की मृत्यु हुई है। इनमें से 60 शिशुओं का वजन सामान्य से कम था।
सीएमएचओ डाॅ. पंकज दुबे ने बताया कि जन्म के 28 दिन के भीतर जन्में 1 हजार बच्चों में से हर साल 13 प्रतिशत बच्चों की मौत जिले में हो रही है। वर्तमान में देश की शिशु मृत्यु दर 18 प्रतिशत है। जबकि मध्यप्रदेश में 26 प्रतिशत नवजात बच्चे हर साल दमतोड़ रहे हैं।
इस मृत्यु दर को कम करने समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) का शुभारंभ प्रदेश के कमिश्नर हेल्थ धनराजू एस व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डाॅ. सलोनी सिडाना ने शुभारंभ किया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक नवजात शिशु मृत्यु दर को घटाकर सिंगल डिजिट (इकाई अंक) में लाना है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में इस अभियान पर काम तेजी से शुरू कर दिया है।
एसएनसीयू वार्ड में भर्ती जुड़वा नवजात बच्चों को 16 अक्टूबर को स्वास्थ्य होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया है। जुड़वा बच्चों के पिता नैनपुर रैवाड़ा निवासी आनंद यादव ने बताया कि 29 सितंबर को उनकी पत्नी कविता यादव ने एक बालक और एक बालिका दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था।
जन्म के बाद दोनों बच्चों को बेहतर देखभाल के लिए वार्ड में भर्ती किया था, जहां 18 दिन रहने के बाद दोनों बच्चों के पूरी तरह स्वस्थ होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई है। बच्चों के इलाज के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। वहीं मलारा मुआर निवासी योगेश भोयर ने बताया कि 9 अक्टूबर को अस्पताल में जन्मी 2 किलो 300 ग्राम की बालिका वार्ड में भर्ती है, जिसके वजन के साथ स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
सीएमएचओ के डाॅ. पंकज दुबे बोले-अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में दो वेंटिलेटर (सीपैप) मशीनें ठीक से काम कर रही हैं। 600 से 800 ग्राम जैसे कम वजन वाले बच्चों को बचा पाना चिकित्सा सीमाओं के चलते चुनौतीपूर्ण होता है। व्यवस्थाओं को सुधारने बनी जांच टीम ने रिपोर्ट सौंप दी है, इसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
ज्यादा बच्चों को रेफर करने वाले एक डाॅक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। मेडिकल काॅलेज के डाॅक्टर केवल ओपीडी सेवाएं रहे हैं। डाक्टरों की कमी को दूर करने मेडिकल कालेज के डीन के साथ मिलकर रोस्टर बनाने पर विचार किया जा रहा है।
शुक्रवार को कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित कर जिला अध्यक्ष नरेश मरावी, केवलारी विधायक रजनीश हरवंश सिंह, छिंदवाड़ा के परासिया विधायक सोहन बाल्मिकी, पूर्व जिला अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने सिवनी अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में छह माह के दौरान 80 बच्चों की मौत मामले में लापरवाही का आरोप लगाया हैं।
कांग्रेसियों का कहना है कि नवजात शिशुओं की मौत मामले में उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए। बच्चों की मौत के मामले में प्रदेश की भाजपा सरकार गंभीर नहीं है। छिंदवाड़ा, बालाघाट के बाद अब सिवनी जिले में बड़ी संख्या में नवजात शिशुओं की मौत सामने आई हैं। इस मामले में दोषियों पर कठोर कार्रवाई होना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनर्रावृत्ति रूक सके।
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