
नईदुनिया प्रतिनिधि, शहडोल। एक तरफ पुलिस 28 सितंबर से 8 अक्टूबर तक 10 दिवसीय हेलमेट-सीटबेल्ट अभियान चला रही है। चौराहों और हाईवे पर चेकिंग कर समन शुल्क वसूला जा चुका है,तो दूसरी तरफ बुढ़ार एनएच-43 पर तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की जान ले ली।
एक युवक लल्लू बैगा (50) निवासी हर्री की घटनास्थल पर मौत हो गई थी,जबकि राजू कुशवाहा (30) निवासी सारंगपुर ने मेडिकल काॅलेज में दम तोड़ा है।
घटना के बाद लंबा जाम लग गया था, क्योंकि घटना बीच सड़क पर हुई और लोग जमा हो गए थे। मामले की जांच चल रही है कि घटना कैसे हुई है। दोनों युवक हेलमेट भी नहीं लगाए थे। हादसे ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था और चालकों की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
टोल प्लाजा के पास तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद स्वजनों और स्थानीय लोगों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया।
सोहागपुर थाना प्रभारी रामायण रावत ने बताया कि हादसे में दोनों मोटरसाइकिल सवार हेलमेट नहीं लगाए थे। यदि हेलमेट होता तो शायद इतनी चोट नहीं लगती और जान बच जाती।
यदि हादसे के समय हेलमेट पहना होता तो सिर की चोट की गंभीरता कम हो सकती थी।वहीं कार की तेज रफ्तार, ड्राइविंग व्यवहार और नशे की स्थिति की भी जांच जरूरी है, क्योंकि एक चालक की लापरवाही दूसरे की जान जोखिम में डाल देती है।
यह हादसा बताता है कि हेलमेट और सीटबेल्ट चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि जीवन बचाने की ढाल हैं। सड़क पर नियम टूटने पर सिर्फ कानून नहीं, किसी परिवार की पूरी दुनिया टूट जाती है।
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