• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • शहडोल

शहडोल में करंट से मरे साथी हाथी की कब्र पर पहुंचा झुंड, डीएफओ बोलीं- हाथियों में भी इंसानों जैसा शोक व्यवहार

इंसान अपनों को खोने पर शोक मनाता है, लेकिन बेजुबान कहे जाने वाले हाथी भी साथी की मौत को गहराई से महसूस करते हैं। शहडोल में ऐसी ही एक संवेदनशील तस्वीर ...और पढ़ें

By Vinod ShuklaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 07:43:04 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 07:43:04 PM (IST)
शहडोल में करंट से मरे साथी हाथी की कब्र पर पहुंचा झुंड, डीएफओ बोलीं- हाथियों में भी इंसानों जैसा शोक व्यवहार
शहडोल में करंट से मरे साथी हाथी की कब्र पर पहुंचा झुंड

HighLights

  1. करंट से मरे साथी की कब्र पर पहुंचा हाथियों का झुंड
  2. चंदौली में दफन साथी की याद में लौटे हाथियों ने दी श्रद्धांजलि
  3. डीएफओ बोलीं- 'हाथियों में होती है एन्सेस्ट्रल मेमोरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, शहडोल। इंसान अपनों को खोने पर शोक मनाता है, लेकिन बेजुबान कहे जाने वाले हाथी भी साथी की मौत को गहराई से महसूस करते हैं। शहडोल में ऐसी ही एक संवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहां करंट से मारे गए हाथी को दफनाने के बाद उसी झुंड के हाथी उसकी कब्र पर पहुंचे और देर तक वहां ठहरे। यह मंजर वन्यजीवों के सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक जुड़ाव की मिसाल बन गया है।

मामला पश्चिम ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक पीएफ-77, बीट चचाई के अंतर्गत ग्राम चंदौली के वार्ड नंबर 7 का है। यहां खेत के पास बोरवेल के समीप करंट लगने से 15 वर्षीय नर मखना हाथी की मौत हो गई थी। वन विभाग ने नियमानुसार शव को विधिवत दफनाया था।


दफनाने के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने सबका ध्यान खींचा। जिस झुंड का मृत हाथी हिस्सा था, उसी झुंड के हाथी दफन स्थल पर पहुंचे। बताया गया कि जिस दिन मौत हुई, उस दिन भी झुंड उसी जगह लौटा था और दूसरे दिन फिर उसी स्थान पर पहुंचकर कुछ देर ठहरा। झुंड की इस मौजूदगी को मृत साथी के प्रति भावनात्मक लगाव और शोक व्यवहार के रूप में देखा जा रहा है।

यह भी पढ़ें- फिर बांधवगढ़ से 30 हाथियों का झुंड शहडोल पहुंचा, फसलें रौंदकर झोपड़ियां तोड़ीं; कई बेबी एलीफेंट भी शामिल

उत्तर वन मंडलाधिकारी तरुणा वर्मा ने बताया कि हाथियों का स्वभाव सामाजिक होता है, वे झुंड में रहते हैं और उनके बीच गहरे सामाजिक संबंध होते हैं। जिस तरह मनुष्य प्रियजनों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हैं, उसी तरह हाथियों में भी शोक जैसा व्यवहार देखा जाता है।

हाथियों में एन्सेस्ट्रल मेमोरी यानी पूर्वजों से जुड़ी स्मृति और सामाजिक व्यवहार की विशेषताएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। हालांकि केवल एक स्थान पर पहुंचने को वैज्ञानिक रूप से शोक सभा कहना उचित नहीं होगा, लेकिन यह दृश्य उनके आपसी जुड़ाव की संवेदनशील तस्वीर जरूर पेश करता है।