
शहडोल(नईदुनिया प्रतिनिधि)। बुधवार को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रदेश के प्रमुख सचिव के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डॉक्टरों ने सवाल खड़ा किया है कि जब जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ बीएस बारिया को मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सहित सभी जांच करने वाली टीमों ने क्लीन चिट दे दी है तो फिर उन्हें पद से क्यों हटाया जा रहा है। डॉक्टरों ने इस मामले में एक ज्ञापन सौंपते हुए प्रमुख सचिव से अपील की है कि डॉक्टर वीएस बारिया को सिविल सर्जन के पद से न हटाया जाए क्योंकि अगर ऐसा होता है तो वह जिला अस्पताल में काम नहीं कर पाएंगे और असहज महसूस करेंगे। डॉक्टरों ने यह अपील भी की है कि अगर सिविल सर्जन भी वीएस बारिया हटा दिया गया है तो उन्हें फिर से पदस्थ कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने बेहद अच्छे कार्य किए हैं।
डॉक्टरों ने यह दिए तर्कः ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि डॉ वीएस बारिया सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक शहडोल को अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्ना क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रशंसा पत्र दिए गए हैं। कोविड-19 में प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। स्थानीय स्तर पर कलेक्टर द्वारा एवं प्रबुद्घ बुद्घिजीवी और पत्रकारों द्वारा भी डॉक्टर बारिया को सम्मानित किया जा चुका है। उनके द्वारा कोई भी ऐसा कृत्य नहीं किया गया जिससे अस्पताल की बदनामी हुई हो। अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की पूरी कोशिश की गई थी।
सीएमएचओ का जिक्र नहीं : मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव के नाम कलेक्टर को सौंपा गए इस ज्ञापन में सीएमएचओ डॉ राजेश पांडे के संबंध में किसी भी तरह का कोई जिक्र नहीं किया गया है। जबकि स्वास्थ्य मंत्री ने मंगलवार की शाम को कहा था कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को निर्देशित किया है कि शहडोल जिला चिकित्सालय के सीएस वीएस बारिया और शहडोल जिले के सीएमएचओ डॉ राजेश पांडे को हटा दिया जाए। सौंपे गए ज्ञापन में सीएमएचओ डॉ राजेश पांडे के फेवर में किसी भी तरह की कोई बात नहीं लिखी है। हालांकि मौखिक तौर पर डॉक्टरों ने कहा है कि दोनों ही को हटाना अनुचित होगा।
मंत्री ने दी थी क्लीन चिटः मंगलवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद जब मंत्री डॉक्टर प्रभु राम चौधरी पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे तो उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि जिला अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के मामले में किसी भी तरह से डॉक्टर जिम्मेदार नहीं हैं। डॉक्टरों ने अस्पताल में उपलब्ध सभी संसाधनों का पूरा उपयोग करते हुए बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में देरी ही उनकी मृत्यु का प्रमुख कारण रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने साफ तौर से जिला अस्पताल के डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी थी। वही कलेक्टर और कमिश्नर द्वारा प्रदेश शासन को भेजी गई रिपोर्ट में भी जिला अस्पताल के डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी गई थी। इसके अलावा बाहर से आई टीम के सदस्यों ने भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं और जिले की स्थिति को देखने के बाद यही कहा था कि जिला अस्पताल में स्थिति बहुत बेहतर है।
यह है मामला : जिला अस्पताल में पिछले लगभग 2 सप्ताह में लगातार बच्चों की मौत से जिला चिकित्सालय का नाम सुर्खियों में रहा है। जिला चिकित्सालय में भर्ती कई बच्चों की मौत अलग-अलग दिन हो गई थी। यह बधो उमरिया अनूपपुर और शहडोल जिले के थे। इन बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया था। ज्यादातर बच्चों को निमोनिया था और कुछ बच्चों में जन्मजात समस्याएं भी थी जिसकी वजह से उनकी मौत होने की बातें स्वास्थ्य मंत्री ने कही थी।