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MP के शाजापुर जिले में चार बच्चों का स्कूल, दो टीचर; फिर भी क्लास में सन्नाटा

Shajapur Primary School: गांव में करीब 40 से 50 परिवार रहते हैं और 50 से अधिक बच्चे हैं। इसके बावजूद सरकारी प्राथमिक विद्यालय में केवल चार बच्चों के न...और पढ़ें

By santosh dasheriyaEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 07:56:48 AM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 08:04:51 AM (IST)
MP के शाजापुर जिले में चार बच्चों का स्कूल, दो टीचर; फिर भी क्लास में सन्नाटा
रखरखाव के अभाव में जर्जर होता जा रहा है स्कूल भवन।

HighLights

  1. चार में से तीन पहली और एक बालिका तीसरी कक्षा में है
  2. दोनों टीचर को दूसरे स्कूल भेजा, लेकिन उपस्थिति यहीं से
  3. जर्जर भवन और पढ़ाई के माहौल की समस्या आ रही सामने

संतोष दशेरिया, नईदुनिया, शाजापुर। शाजापुर जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम पचोला हरनाथ का प्राथमिक विद्यालय सरकारी शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर दिखा रहा है, जहां चार बच्चों के लिए दो शिक्षिकाएं तैनात हैं, लेकिन कक्षाओं में बच्चे ही नहीं हैं। हालत यह है कि विभागीय निरीक्षण में चारों विद्यार्थी गायब मिले और कक्षाओं में पढ़ाई के बजाय सन्नाटा मिला।

इसके बाद शिक्षिकाओं को दूसरी शालाओं में भेजने के आदेश हुए, लेकिन आरोप है कि हाजिरी फिर भी पुरानी शाला में ही लगती रही। गांव में करीब 40 से 50 परिवार रहते हैं और 50 से अधिक बच्चे हैं। इसके बावजूद सरकारी प्राथमिक विद्यालय में केवल चार बच्चों के नाम दर्ज हैं। इनमें तीन पहली और एक बालिका तीसरी कक्षा में है।


पिछले वर्ष यहां 13 बच्चे दर्ज थे। जिला परियोजना समन्वयक राजेंद्र शिप्रे ने छह अगस्त 2026 को विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया था। इस दौरान रजिस्टर में चार बच्चों के नाम मिले, लेकिन एक भी उपस्थित नहीं था।

इसके बाद विभाग ने शिक्षिका चंद्रलेखा नागर को प्राथमिक विद्यालय पिपल्यागोपाल और अलका भाटी को प्राथमिक विद्यालय कांजा में शैक्षणिक कार्य करने के आदेश दिए। आरोप है कि दोनों शिक्षिकाएं पुराने स्कूल से ही ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करती रहीं।

घटना से उठते सवाल

  • स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घटती रही, लेकिन विभाग ने समय रहते ध्यान क्यों नहीं दिया?
  • जर्जर भवन और पढ़ाई के माहौल की समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ?
  • चारों बच्चों की लगातार अनुपस्थिति की निगरानी किसने की?
  • दूसरी शाला में भेजे जाने के बाद पुरानी शाला में उपस्थिति कैसे दर्ज होती रही?

यह भी पढ़ें- सरगुजा में 29 साल से झोपड़ी में चल रहा सरकारी स्कूल, 17 बच्चे घास-फूस के छप्पर में पढ़ने को मजबूर

प्राचार्य से जानकारी मांगी गई

स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति शून्य मिलने पर दोनों शिक्षिकाओं की शैक्षणिक व्यवस्था पहले ही अन्य स्कूलों में कर दी गई थी। इसके बावजूद वे वहां पढ़ाने क्यों नहीं गईं, इस संबंध में प्राचार्य से जानकारी मांगी गई है। - राजेंद्र शिप्रे, जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी)

विद्यार्थियों की संख्या कम हुई

दूसरे स्कूल में शैक्षणिक व्यवस्था का आदेश आज ही संकुल और जन शिक्षा केंद्र से वॉट्सएप के माध्यम से मिला है। इसलिए अब तक पुराने स्कूल में ही उपस्थिति दर्ज कराने जा रहे थे। स्कूल जर्जर और अव्यवस्थित होने के कारण पालक बच्चों को नहीं भेज रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। - चंद्रलेखा नागर, प्रधान अध्यापक, पचोला हरनाथ