
मोहित व्यास, नईदुनिया, शाजापुर : जिले में एक बार फिर दक्षिण अफ्रिका की टीम की मदद से बोमा पद्धति और हेलीकाप्टर से हांका लगाकर नीयगाय और कृष्ण मृग पकड़ने के लिए अभियान चलेगा। गत वर्ष करीब एक हजार कृष्णमृग और नीलगाय पकड़े गए थे। इस बार पहले से दोगुना लक्ष्य रखा गया है।
करीब दो हजार नीलगाय और कृष्णमृग पकड़े जाएंगे। वन अमले द्वारा जिले में नीलगाय और कृष्णमृग की मौजूदगी वाले क्षेत्रों का सर्वे किया जा रहा है। नौ अक्टूबर से अभियान की शुरूआत होगी। आठ अक्टूबर को दक्षिण अफ्रिका की टीम जिले में आ जाएगी। बीते वर्ष हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड पुलिस लाइन शाजापुर में बनाया गया था। जो इस बार शुजालपुर में बनाया जाना प्रस्तावित है।
पिछले वर्ष का अभियान कई मायनों में बड़ी उपलब्धि और सफल रहा। अभियान के दौरान मिली सफलता को देखते हुए कृष्णमृग और नीलगाय पकड़ने का लक्ष्य भी दोगुना कर दिया गया था। खास बात यह भी रही कि दक्षिण अफ्रीका की टीम की मदद से स्थानीय वन अमले ने भी बोमा पद्धति की बारिकियां सीखी। जिससे जिले में अब अभियान चलाना काफी आसान है।
अभियान में शाजापुर जिले के साथ ही मंदसौर, नीमच, रतलाम, देवास, राजगढ़, उज्जैन व अन्य कुछ जिले की वन विभाग टीम ने अभियान में हिस्सा लिया और तकनीक सीखी, जिसका लाभ इस बार मिलेगा। टीम में पायलट, चिकित्सक, वाहन चालक भी शामिल रहे।
पिछले वर्ष अभियान में दक्षिण अफ्रीका की टीम एक दिन जो काम करती थी, अगले दिन वह जिम्मेदारी स्थानीय टीम द्वारा पूरी की जाती थी। इस तरह जमीनी स्तर पर अभियान में सीखी तकनीक का प्रयोग भी करके देखा गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने तक जमीनी बारिकियां सीखी। इस दौरान अधिकारी और कर्मचारी में कोई फर्क नही रहा। जिसे जो जिम्मेदारी मिली। उसने निभाई, फिर चाहे वन्यजीव वाले वाहनों के दरवाजे खोलना बंद करना हो, या बोमा के पर्दे खोलना बंद करना हो। यह अभियान स्वदेशी टीम के लिये एक बेहतरीन प्रयोग रहा था।
वन्य जीव कृष्णमृग और नीलगाय द्वारा किसानों की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया जाता है। इससे राहत दिलाने के लिए ही वन विभाग द्वारा जिले में अभियान चलाकर नीलगाय और कृष्णमृग पकड़कर अन्यत्र छोड़े गए थे। अब एक बार फिर इसी समस्या से राहत के लिए अभियान चलने वाला है।
अभियान के दौरान स्थानीय लोगों की मदद भी ली जाएगी। दरअसल अभियान में विदेशी टीम और हेलीकॉप्टर को देखने को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह रहता है। ऐसे में उन्हें अभियान वाले स्थान पर आने से रोकने के लिए स्थानीय लोगों का ही सहयोग लिया जाता है। साथ ही वन्यजीवों की मौजूदगी आदि के बारे में भी ग्रामीणों का जानकारी होती है। जो वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में अभियान चलाया जाएगा। उन क्षेत्रों में सहयोगी लोगों को चिन्हित किया जा रहा है।
नौ अक्टूबर से कृष्णमृग और नीलगाय पकड़ने के लिए अभियान चलेगा। दक्षिण अफ्रिका की टीम भी शामिल रहेगी। इस बार दो हजार कृष्णमृग और नीलगाय पकड़कर अन्यत्र भेजने का लक्ष्य मिला है। अभियान को लेकर तैयारी की जा रही हैं। - फतेसिंह निमामा, उप वनमंडलाधिकारी शाजापुर
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