
नईदुनिया प्रतिनिधि, शाजापुर : जिले में नौ अक्टूबर से दक्षिण अफ्रीका की टीम की मदद से वन विभाग द्वारा कृष्ण मृग पकड़कर अन्यत्र भेजे जाने का अभियान चल रहा है। 31 अक्टूबर तक यह अभियानि चलेगा। जिसमें कुल दो हजार कृष्ण मृग पकड़कर अन्यत्र भेजे जाने का लक्ष्य है। अभियान में अब तक सात बार में 537 कृष्ण मृग पकड़कर विभिन्न अभ्यारण्य में भेजे जा चुके हैं।
शनिवार को शुजालपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम टिटवास में 49 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। जबकि शुक्रवार को यहां से 109 कृष्णमृग पकड़कर स्थांतरित किए गए थे। इस प्रकार ग्राम टिटवास में दो दिन में कुल 158 कृष्ण मृग का रेस्क्यू किया है। अभियान उका द्देश्य मानव–वन्यप्राणी द्वंद्व एवं फसलों को होने वाली क्षति को कम करना है। इसके साथ ही कृष्ण मृगों को सुरक्षित तरीके से उपयुक्त वन्य आवास में स्थानांतरित करना है। हालांकि स्थानांतरण के बाद वह शेर, चीता, तेंदुआ व अन्य मासाहारी वन्यजीवों के भोजन बनेंगे।

जिले में यह अभियान दूसरी बार चल रहा है। पहली बार पिछले वर्ष भी अभियान जिले में चलाया गया था। तब करीब एक हजार कृष्ण मृग और नीलगाय पकड़कर अन्यत्र भेजे गए थे। अभियान में दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ संस्था कंजर्वेशन सॉल्यूशंस तकनीकी मदद कर रही है। साथ ही, पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रशिक्षित मैदानी कर्मचारियों की टीम वन्यजीवों के रेस्क्यू, हैंडलिंग एवं परिवहन का कार्य कर रही है।
कृष्ण मृग रेस्क्यू के इस अभियान को सरकार किसानों को बड़ी राहत और उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। जिले के मंत्री, विधायक भी लगातार अभियान को इंटरनेट के माध्यम से प्रचारित कर रहे हैं। जानकारी अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी अभियान, बोमा पद्धति का अवलोकन करने के लिए आ सकते हैं। इसके पहले वन विभाग के प्रमुख सचिव से लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारी जिले का भ्रमण कर अभियान का अवलोकन कर जानकारी ले चुके हैं।
यह भी पढ़ें- Helicopter से नीलगायों की 'हांक', 8 नीलगाय को और पकड़ा, अब तक 501 कृष्णमृग और 67 नीलगाय पकड़े