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मंडी में प्याज दो रुपए किलो होने पर किसानों का छलका दर्द, बोले- ट्रक का किराया भी नहीं निकलेगा

MP News: मध्य प्रदेश के शाजापुर की कृषि मंडी में बुधवार को प्याज की बंपर आवक के साथ ही भाव ऐसा गिरा कि किसान मायूस होकर लौटे। स्थिति यह रही कि कुछ किस...और पढ़ें

By santosh dasheriyaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 29 Oct 2025 08:03:47 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Oct 2025 08:03:47 PM (IST)
मंडी में प्याज दो रुपए किलो होने पर किसानों का छलका दर्द, बोले- ट्रक का किराया भी नहीं निकलेगा
मंडी में प्याज दो रुपए किलो होने पर किसानों का छलका दर्द

HighLights

  1. प्याज की एक दिन में 27 हजार 497 क्विंटल की बंपर आवक
  2. दाम गिरे तो किसान बोले –भाड़ा निकालना भी मुश्किल
  3. कमिश्नर ने मंडी अधिकारियों को जांच के निर्देश देने पड़े

नईदुनिया न्यूज, शाजापुर। कृषि उपज मंडी शाजापुर में बुधवार को प्याज की बंपर आवक के साथ ही भाव ऐसा गिरा कि किसान मायूस होकर लौटे। स्थिति यह रही कि कुछ किसानों की प्याज दो रुपए प्रति किलो तक बिकी। कमिश्नर आशीष सिंह के निरीक्षण के दौरान एक किसान ने खुद अपनी व्यथा बताई कि साहब, जो भाव मिला है, उससे ट्रक का किराया भी नहीं निकलेगा। बामनगांव निवासी किसान पूनमचंद पुत्र गुलाब सिंह ने कमिश्नर से मुलाकात कर अपनी नीलामी पर्ची दिखाई और बताया कि उनकी 40 कट्टी प्याज मात्र दो रुपए प्रति किलो के हिसाब से कुल 3200 रुपए की बिक्री हुई।

“साहब, इतना खर्च तो खेत से मंडी तक ट्रक में प्याज लाने में लग गया। अब तो घाटा ही घाटा है।' किसानों की यह शिकायत सुनकर खुद संभाग कमिश्नर आशीष सिंह ने मंडी अधिकारियों को जांच के निर्देश देने पड़े। कमिश्नर ने मौके पर ही मंडी सचिव और संबंधित अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने कहा कि किसानों को उचित मूल्य दिलाने में किसी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने और नीलामी में निष्पक्षता बनाए रखने के निर्देश दिए। मंडी में बुधवार को प्याज की रिकॉर्ड 27,497 क्विंटल आवक हुई। इतनी भारी मात्रा में प्याज आने से भाव औंधे मुंह गिर गए। कई किसानों को दो से चार रुपए प्रति किलो के बीच का भाव मिला।


भावांतर योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम

बुधवार दोपहर को उज्जैन संभाग कमिश्नर आशीष सिंह शाजापुर कृषि उपज मंडी पहुंचे। उन्होंने भावांतर योजना के तहत सोयाबीन खरीदी की समीक्षा की। व्यापारियों और किसानों के बीच नीलामी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और किसानों से बातचीत कर मंडी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

कमिश्नर सिंह ने कहा कि “राज्य सरकार किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। भावांतर योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। मंडी में मौजूद व्यापारियों और अधिकारियों ने बताया कि प्याज की दर गुणवत्ता के आधार पर तय होती है। जो प्याज आकार में छोटी या नमीदार होती है, उसका भाव स्वाभाविक रूप से कम रहता है। किसान सवाल कर रहे हैं जब मेहनत का दाम नहीं मिलेगा, तो खेती कौन करेगा? वहीं जब तक बाजार व्यवस्था में स्थायित्व नहीं आता, तब तक प्याज के आंसू किसानों की आंखों से बहते रहेंगे।

मंडी परिसर में किसानों की भीड़, मायूस चेहरे

सुबह से मंडी परिसर में ट्रैक्टर-ट्रालियों की कतारें लगी रहीं। किसानों की भीड़ ऐसी थी कि प्याज की बोरियां मंडी के गेट के बाहर तक ढेर लग गईं। परंतु जब नीलामी शुरू हुई, तो भाव सुनकर कई किसानों के चेहरे उतर गए। किसी को दो, किसी को तीन, तो कुछ को चार किलो का भाव मिला वहीं अधिकतम भाव 1075 प्रति क्विंटल रहा। कई किसानों ने अपनी उपज वापस ले जाने का विचार भी किया, लेकिन ट्रांसपोर्ट खर्च के डर से उन्हें औने-पौने भाव पर बेचना पड़ा।

किसानों ने बताया कि इस सीजन में प्याज की पैदावार अच्छी रही, लेकिन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपए खर्च करने के बाद जब दो किलो का भाव मिलता है, तो हिम्मत टूट जाती है। किसानों ने प्रशासन से प्याज की खरीदी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और परिवहन सहायता देने की मांग की।

प्याज के गिरते दामों को लेकर किसान संघ ने पहले भी कड़ा विरोध जताया है। मंडी में दो से तीन रुपये किलो का भाव मिलना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। खेतों में दिन-रात मेहनत करने के बाद इतनी कम कीमत मिलना निराशाजनक है। किसानों को उनका उचित हक मिले नहीं तो यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।-सवाई सिंह सिसोदिया, जिला अध्यक्ष किसान संघ।