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चीता प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता, 54 में से 38 चीते भारतीय, अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी दिखेगा कुनबा

कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मे चीतों का कुनबा बढ़कर 41 हो गया है, जो विदेशी चीतों से अधिक है। चीता पुनर्स्थापना परियोजना के तहत शावकों का सर्वाइव...और पढ़ें

By Deepak DandotiyaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 12:45:26 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 12:45:26 PM (IST)
चीता प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता, 54 में से 38 चीते भारतीय, अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी दिखेगा कुनबा
चीता प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कूनो नेशनल पार्क में कुल 54 चीते मौजूद हैं।
  2. भारत में जन्मे चीतों की संख्या अब 41 पहुंची।
  3. पार्क में विदेशी मूल के कुल 19 चीते हैं।

दीपक दंडौतिया . नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर : कूनो नेशनल पार्क जन्मे यानी भारतीय चीतों की बढ़ती संख्या ने चीता पुनर्स्थापना परियोजना के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। कम उम्र के देसी चीतों की अच्छी उपस्थिति इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे आगामी वर्षों में कुनबे के विस्तार में योगदान कर सकेंगे।

परियोजना की सफलता अब केवल देश में चीतों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके स्वस्थ रहने, प्राकृतिक वातावरण में ढलने और उनमें अगली पीढ़ी तैयार करने की क्षमता भी निर्भर करेगी।

कूनो में विदेशी से अधिक हुई भारत में जन्मे चीतों की संख्या

उल्लेखनीय है कि ढाई वर्ष की उम्र के बाद चीता वयस्क माना जाता है। वर्तमान में कूनो में 54 चीते हैं, उनमें 38 भारत में जन्मे हैं। इनमें एक साल से कम उम्र के 28 शावक सबसे बड़ा समूह हैं। वहीं, एक से ढाई वर्ष के 10 और तीन से छह वर्ष के 16 चीते शामिल हैं। वयस्क समूह में विदेशी चीतों में नामीबिया के दो, दक्षिण अफ्रीका के पांच और बोत्सवाना के सात चीते शामिल हैं। इस तरह कूनो में अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या विदेशी मूल के चीतों से अधिक है।


सर्वाइवल रेट में कूनो का प्रदर्शन उच्च स्तर पर

केंद्र सरकार की मार्च 2026 में जारी जानकारी के अनुसार, शावकों की सर्वाइवल रेट 73.33 प्रतिशत रही। सरकार ने इसे दुनिया में चीतों के पुनर्स्थापन की परियोजनाओं के मुकाबले ऊंचे स्तरों में शामिल बताया था। हालांकि, अलग-अलग देशों के आंकड़ों की तुलना करते समय अवधि, उम्र और निगरानी की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों के आंकड़े

  • कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से दो जीवित हैं। दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों में से आठ चीते जिंदा हैं। इस लिहाज से शुरुआती समूहों में नामीबियाई चीतों की जीवित रहने की दर 25 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीकी चीतों की 66.7 प्रतिशत रही।

  • बोत्सवाना से आए नौ चीते अपेक्षाकृत हाल में यहां पहुंचे हैं, इसलिए उनके लिए इतनी कम अवधि में सर्वाइवल रेट की तुलना करना उचित नहीं होगा। ये आंकड़े अलग-अलग मूल समूहों की स्थिति बताते हैं, न कि उन देशों के प्राकृतिक आवास में चीतों की सर्वाइवल रेट।
  • फैक्ट फाइल

    • कुल चीतों की संख्या 60 है।
    • 41 भारत में जन्मे चीता हैं। 19 चीते विदेशी हैं। इनमें 2 नामीबिया, 8 साउथ अफ्रीका, 9 बोत्सवाना के हैं।
    • 28 शावक एक साल से कम उम्र के हैं।
    • 7 शावक 1 से 2 साल के बीच की उम्र के हैं।
    • 54 चीते कूनो नेशनल पार्क में।
    • 04 गांधीसागर में।
    • 2 नौरादेही में रह रहे।

    विदेश से लाए चीतों से ज्यादा भारत में जन्मे चीतों की संख्या

    भारत में जन्मे शावक-चीतों की संख्या अब विदेश से लाए चीतों से ज्यादा हो गई है। यह देश के लिए बड़ी खुशखबरी है, पूरी उम्मीद है कि भारतीय चीते आने वाले समय में अपनी संख्या को और बढ़ाएंगे। अब कूनो के अलावा गांधीसागर और नौरादेही में भी चीते रह रहे हैं। उत्तम शर्मा, सीसीएफ, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर।

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