
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में न्यायालय ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एवं अनन्य विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) बबीता होरा शर्मा की अदालत ने दो आरोपितों को आजीवन कारावास, विभिन्न धाराओं में कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
पीड़िता को 10 लाख रुपये प्रतिकर दिलाने का भी आदेश दिया गया है। न्यायालय ने कहा कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम है और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया, जो अत्यंत गंभीर अपराध है।
ऐसे कृत्य समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय और असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं। यदि मासूम बच्चे डर और असुरक्षा में जीएंगे तो उनका विकास बाधित होगा। ऐसे अपराधों पर कठोर दंड ही समाज में कानून का भय और न्याय में भरोसा कायम रख सकता है।
प्रकरण थाना कोतवाली क्षेत्र का है। 16 सितंबर 2024 को दोपहर करीब 3 बजे नाबालिग पीड़िता घर से रुपये लेकर मोहल्ले की दुकान पर सामान लेने जा रही थी। इसी दौरान गली के पास आरोपित नानका उर्फ शोएब उससे मिला और सामान दिलाने के बहाने उसे अपनी गली में ले गया।
जैसे ही पीड़िता वहां पहुंची, आरोपित ने जबरन उसका हाथ पकड़कर मकान के अंदर खींच लिया। वहां पहले से मौजूद दूसरा आरोपित मोहसिन उर्फ मोसीन ने दरवाजा बंद कर दिया। अभियोजन के अनुसार आरोपितों ने पीड़िता के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी दी।
एक आरोपी ने गालों पर थप्पड़ मारे, जबकि दूसरे ने गर्दन पर चाकू रखकर उसे डरा-धमकाया। इसके बाद नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया गया। इसी दौरान वह दुकानदार वहां पहुंच गया, जिससे पीड़िता सामान लेने गई थी। दुकान वाले से आरोपित का झगड़ा हुआ, शोर सुनकर पीड़िता की मां और भाई मौके पर पहुंचे और किसी तरह उसे आरोपियों के चंगुल से छुड़ाकर घर ले आए।
अदालत ने दोनों आरोपियों पर लगाए गए जुर्माने से अलग पीड़िता को 10 लाख रुपये प्रतिकर दिलाने का आदेश भी पारित किया। न्यायालय ने माना कि इस तरह के अपराध में पीड़िता को शारीरिक ही नहीं, मानसिक और सामाजिक आघात भी सहना पड़ता है, जिसकी भरपाई के लिए मुआवजा आवश्यक है।