
देवेंद्र गौड़। सोंईकलां
कोरोना वायरस की दस्तक के बाद शुरू हुए लॉकडाउन ने देश-प्रदेश के लाखों मजदूरों और निजी सेक्टर के कर्मचारियों की तरह जिले के कोटरा गांव निवासी एक मजदूर पिता को भी बेरोजगार बना दिया। इसका असर उसके बेटे के जीवन पर ऐसा पड़ा, कि उसका एसआइ बनने का सपना टूट गया। युवक को एसआइ की पढ़ाई बीच में छोड़कर अपने परिवार के गुजारे के लिए बाइक द्वारा गांव-गांव में घूमकर सब्जी बेचनी पड़ रही है। शासन-प्रशासन का लॉकडाउन तो अब खुल चुका है, लेकिन दलवीर के सपने का लॉकडाउन बड़ा मजबूत है। शायद ही सपने पर लगा लॉक खुले और वह फिर से एसआई की तैयार कर सके।
कोटरा गांव निवासी दलवीर पुत्र मलखान जाटव ने बताया कि उनकी पुलिस विभाग में एसआइ बनने की इच्छा थी, जिसे पूरी करने के लिए वह अपने मजदूर पिता की कमाई के बलबूते पर इंदौर में रहकर पिछले तीन साल से पढ़ाई कर रहे थे। उनके पिता मजदूर भले ही थे, लेकिन बेटे के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पर जैसे ही साल 2020 में कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया भर के साथ देश-प्रदेश में दस्तक दी, तो उनके मजदूर पिता बेरोजगार हो गए। इसके बाद दलवीर को एसआइ की पढ़ाई को बीच में छोड़कर अपने घर वापस लौटना पड़ा। करीब छह महीने से भी ज्यादा समय तक रहे लॉकडाउन ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया। इससे दिनों-दिन मलखान के परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी, जिसे देखकर दलवीर को अपनी पढ़ाई छोड़नी ही पड़ी। अब दलवीर परिवार के गुजारे के लिए पिछले आठ महीने से बाइक से गांव-गांव घूमकर सब्जी बेचने का काम कर रहे हैं।
कर्ज लेकर उठाई बाइक, छोड़ दी पढ़ाई
दलवीर अपने पिता मलखान की इकलौती संतान हैं। इस वजह से उन पर उनके पिता का स्नेह कुछ ज्यादा ही रहता है। इसी वजह से वह गरीबी की स्थिति में भी अपने बेटे का सपना साकार करने का हर संभव प्रयास कर रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी ने उनके सपनों पर पानी फेर कर रख दिया। अब उन्हें मजबूर होकर अपने बेटे को लोन पर बाइक खरीदकर देनी पड़ी, ताकि उनका बेटा हर परिस्थिति में रोजमर्रा की जरूरत की सब्जी बेचकर अपना और अपने परिवार का गुजारा कर सके।
वर्जन :
मेरा एसआइ बनने का सपना था। मैं पिछले तीन साल से इंदौर में रहकर तैयारी कर रहा था। मेरे पिता मजदूरी करके मुझे पढ़ाई और इंदौर में रहने का खर्चा भेजते थे, लेकिन कोरोना वायरस के आते ही लॉकडाउन लग गया। इसके बाद मुझे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। अब मैं बाइक से गांव-गांव घूमकर सब्जी बेचने का काम करता हूं।
-दलवीर जाटव, ग्रामीण कोटरा।