
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी/बैराड़। ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता को सात सितंबर को निलंबित कर भोपाल अटैच किया गया, लेकिन इसके बाद भी ही उन्होंने बैक डेट में प्रमोशन, समयमान वेतनमान और करोड़ों के बिलों का भुगतान कर दिया।
यह शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता और राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के जिला अध्यक्ष माखन सिंह धाकड़ ने 54 पन्नों के शपथ-पत्र और 57 नगरीय निकायों के बिलों के साथ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई है।
इसके बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति के अध्यक्ष उप संचालक देवेंद्र कुमार व्यास होंगे। सदस्य के रूप में वित्तीय प्रबंधक अभिषेक रघुवंशी, कार्यपालन यंत्री अभिषेक भदौरिया और सहायक संचालक जबर सिंह कुशवाहा रहेंगे। समिति को 15 दिन में बिंदुवार तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है।
अमरसत्य गुप्ता पर आरोप था कि उन्होंने भिंड नगरपालिका के निर्माण घोटाले की जांच पांच माह तक दबाए रखी। इसके अलावा छः विभागीय जांच, 15 लोकायुक्त प्रकरण और हाईकोर्ट की अवमानना याचिकाओं पर जवाब नहीं दिया। इसी पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था।
शिकायत में कहा गया है कि गुप्ता मूल रूप से ‘ख’ श्रेणी के 5400 पे-ग्रेड के अधिकारी हैं। ट्रांसफर नीति 2025 की कंडिका 51 और 2026 की कंडिका 41 व 52 का उल्लंघन कर 16 जून 2026 को उन्हें 7600 पे-ग्रेड वाले संयुक्त संचालक का प्रभार दे दिया गया, जबकि उन पर सीहोर, नर्मदापुरम और मुरैना में वित्तीय भ्रष्टाचार की तीन जांचें पहले से पेंडिंग थीं।
26 नवंबर 2025 से 15 जून 2026 तक बिना विधिवत प्रभार के ही डीडीओ पावर का उपयोग और चेकर आईडी के लिए नियुक्त सहायक लेखाधिकारी पूजा महकाली को चार्ज नहीं देने का भी आरोप है।
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