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शिवपुरी में मकान को लेकर हाईवोल्टेज ड्रामा... 9 महीने के के मासूम संग टंकी पर चढ़ा परिवार, PM Awas का आश्वासन मिलने पर उतरा

करीब दो घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे में नीचे खड़ी पुलिस-प्रशासन की सांसें अटकी रहीं। युवक टंकी से ही परिवार सहित कूदकर जान देने की धमकी देता रहा।

By Devendra SamadhiyaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 07:13:42 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 07:13:42 PM (IST)
शिवपुरी में मकान को लेकर हाईवोल्टेज ड्रामा... 9 महीने के के मासूम संग टंकी पर चढ़ा परिवार, PM Awas का आश्वासन मिलने पर उतरा
अवैध कब्जे पर चले विवाद के बाद टंकी पर चढ़ा परिवार।

HighLights

  1. अवैध कब्जे पर चले विवाद के बाद टंकी पर चढ़ा परिवार
  2. तहसीलदार और टीआई ने फोन पर 2 घंटे की समझाइश
  3. पीएम आवास में आवेदन के वादे के बाद शांत हुआ मामला

नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। शहर के मनीयर में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सरकारी जमीन पर पक्का निर्माण रोकने से नाराज एक युवक अपने पूरे परिवार और नौ माह के दुधमुंहे बच्चे को लेकर 70 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया।

करीब दो घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे में नीचे खड़ी पुलिस-प्रशासन की सांसें अटकी रहीं। युवक टंकी से ही परिवार सहित कूदकर जान देने की धमकी देता रहा। अंत में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और कोतवाली टीआई रोहित दुबे ने मौके पर पहुंचकर उसे पीएम आवास दिलाने का आश्वासन दिया, तब जाकर वह नीचे उतरा।


क्या है पूरा मामला?

मनीयर में सर्वे नंबर 454 की सरकारी जमीन पर पवन जाटव पिछले 25-30 साल से झोपड़ी बनाकर रह रहा है। नगर पालिका द्वारा सड़क बनवाने के बाद उसकी झोपड़ी सड़क से नीची हो गई, जिसमें बारिश का पानी भरने लगा।

परेशान होकर पवन ने उसी जगह बुनियाद भरकर दो पक्के कमरे बनाना शुरू कर दिया। इस पर पड़ोस में रहने वाले महेश धाकड़, बाबू धाकड़ सहित अन्य लोगों ने कोतवाली में शिकायत कर दी कि सरकारी जमीन पर जबरन पक्का कब्जा किया जा रहा है।

शिकायत पर पुलिस पवन के घर पहुंची और जमीन के दस्तावेज मांगे। दस्तावेज न होने पर पुलिस पूछताछ के लिए उसके मामा रामभजन को थाने ले गई। इससे आक्रोशित होकर पवन अपनी मां रामश्री जाटव, पत्नी सपना जाटव और नौ माह के बेटे इशांक को लेकर मनीयर टोल टैक्स के पास बनी जलावर्धन योजना की टंकी पर चढ़ गया।

फोन पर चली दो घंटे बात, फिर माना प्रशासन का आश्वासन

सूचना मिलते ही तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और टीआई रोहित दुबे टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नीचे से फोन पर पवन को समझाने का दौर शुरू हुआ। पवन का एक ही कहना था कि, "मैं 30 साल से यहीं रह रहा हूं, मुझे यहीं घर बनाने दो, नहीं तो न्याय नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगा।"

करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन ने उसे भरोसा दिलाया कि उसे अवैध कब्जे की जगह वैध मकान दिलाया जाएगा, तब कहीं जाकर वह नीचे उतरकर आया।

पीएम आवास की कॉलोनी में करवाएंगे आवेदन

तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने बताया, "पवन जाटव सर्वे नंबर 454 की शासकीय भूमि पर अतिक्रमित है। उसे समझाया गया है कि वह जितना पैसा यहां कच्चे-पक्के निर्माण में लगाएगा, उतने में मेडिकल कॉलेज के पीछे बनी पीएम आवास कॉलोनी में उसे पात्रता के अनुसार पक्का मकान मिल जाएगा। वह बीपीएल श्रेणी का है, उसके पास रहने की व्यवस्था नहीं है। कल उसका आवेदन करवा रहे हैं।"

टंकियां क्यों बनीं आत्मघाती अड्डा?

यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर में जलावर्धन योजना के तहत 8 से 10 बड़ी पानी की टंकियां बनी हैं, लेकिन एक पर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। किसी भी टंकी की सीढ़ियों पर लोहे का गेट या ताला नहीं है। चेतावनी बोर्ड, सीसीटीवी कैमरा और चौकीदार का कोई अता-पता नहीं।

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इसी का परिणाम है कि, शाम होते ही इन टंकियों पर नशेड़ी और आवारा तत्वों की महफिल सजती है। जब जिसके मन में आता है, वह टंकी पर चढ़कर प्रशासन को ब्लैकमेल करता है।

नगर पालिका की जिम्मेदारी क्या है?

मध्यप्रदेश म्युनिसिपल एक्ट और जल प्रदाय मैनुअल साफ कहता है कि, हर जल संरचना पर लोहे का गेट, ताला, खतरे का बोर्ड, सीसीटीवी और 24 घंटे कर्मचारी की तैनाती अनिवार्य है। इसका उद्देश्य पानी को दूषित होने से बचाना और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकना है। लापरवाही पर सीएमओ और जल शाखा प्रभारी पर आपराधिक मामला तक दर्ज हो सकता है। शिवपुरी नपा में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।