
नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी : कोलारस के सांदीपनि स्कूल में पदस्थ प्राचार्य राकेश कुलश्रेष्ठ ने शिक्षिका से अशिष्ट शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि मेरे साथ बाहर घूमने चलो। शिक्षिका ने थाने में जाने की धमकी दी तो पैर छूकर माफी मांगने लगे।
स्कूल के विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो, यह कोई फिसली हुई जुबान नहीं, बल्कि सोचा-समझा दबाव था। आरोप है कि प्राचार्य राकेश कुलश्रेष्ठ महिला शिक्षिकाओं को अकेले में बुलाकर खाली पीरियड का गलत इस्तेमाल करने का दबाव बनाते थे। लगातार की जा रही अशोभनीय टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर एक महिला शिक्षिका ने खुलकर विरोध कर दिया। इसके बाद उन्हें स्कूल से नौकरी छोड़कर जाने को मजबूर होना पड़ गया।
इस पूरे मामले स्कूल में ही हंगामा हुआ और शिक्षिका ने साफ कहा, अब मैं थाने जाऊंगी। थाने की धमकी सुनते ही प्राचार्य ने महिला शिक्षिका के पैर छूकर माफी भी मांगी। वीडियो ने पूरे मामले की पोल खोल दी है। कोलारस में अब एक ही सवाल है, अगर फरमान नहीं दिया था, तो पैर क्यों छूने पड़े? माफी किस गुनाह की?
बहुप्रसारित वीडियो में शिक्षिका एक अन्य शिक्षिका का नाम लेते हुए यह भी कह रही है कि सर, मैंने महिला बाल विकास में अपने बयान पलट कर आपको बचाया है। मैंने वहां जाकर नहीं बताया कि वह मेरे आगे रोई थीं। इसके साथ ही महिला शिक्षिका वीडियो में इस बात की भी गारंटी मांग रही है कि, इस स्कूल में आज के बाद ऐसे कृत्य नहीं होने चाहिए।
इस पूरे मामले में प्राचार्य कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, मुझ पर लगे आरोप निराधार हैं। गलती उन दो महिलाओं की थी, जिन्होंने झूठे आरोप लगाए और अब नौकरी छोड़कर चली गई हैं, लेकिन उनका यह बयान वीडियो के सामने बौना पड़ रहा है। लोग पूछ रहे हैं - अगर दो महिलाएं झूठी थीं और नौकरी छोड़कर चली गईं, तो आप वीडियो में किसके पैर पकड़ रहे हैं और क्यों?
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