
Space Lab in Tikamgarh: मनीष असाटी. टीकमगढ़। सरकारी स्कूल के बच्चों ने अब तक अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर किताबों में ही पढ़ा होगा, लेकिन टीकमगढ़ के कुंडेश्वर गांव में स्थित सरकारी स्कूल में जनसहयोग से अंतरिक्ष लैब कौतूहल शाला तैयार की गई है। यह लैब बच्चों के समक्ष अंतरिक्ष के रहस्यों से पर्दा उठाएगी। बगैर सरकारी मदद के करीब तीन लाख रुपये से लैब तैयार करने का विचार जिला पंचायत सीईओ आइएएस सिद्धार्थ जैन को आया। उन्होंने इसे जनसहयोग से पूरा करा दिया।
सीईओ का दावा है कि सरकारी स्कूलों में इस तरह की लैब प्रदेश में पहली है। लैब में चंद्र व सूर्यग्रहण, सौर मंडल, जोडियक साइन आदि माडल्स शामिल किए गए हैं। इनसे बच्चे जान सकेंगे कि आसमान का रंग नीला क्यों होता है, तारे क्यों चमकते हैं, चांद और सूरज कहां छिप जाते हैं। कंप्यूटर के माध्यम से खगोल विज्ञान से संबंधित साफ्टवेयर्स के उपयोग को भी समझाया जाएगा। लैब जिले के सभी एक हजार से अधिक स्कूलों की आठवीं तक के डेढ़ लाख बच्चों के लिए उपलब्ध रहेगी।
जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर स्थित कुंडेश्वर के सरकारी स्कूल में 350 वर्गफीट के भवन में दिल्ली की कंपनी द्वारा यह लैब बनाई गई है। इसमें राकेट और सेटेलाइट के माडल, टेलीस्कोप, ड्रोन, एयरक्राफ्ट, थ्री-डी प्रिंटर सहित अन्य उपकरण लगाए गए हैं। साथ ही अंतरिक्ष में जाने वालीं कल्पना चावला, राकेश शर्मा और सुनीता विलियम्स के बारे में जानकारियां लैब में संजोयी गई हैं। मंगलयान, सेटेलाइट, कई तरह के एयरक्राफ्ट और रात में टेलीस्कोप के जरिए दूर आसमान से सितारे देखना बच्चों के लिए नया रहेगा। लैब को थ्री-डी बनाने के साथ ही इसमें कई जानकारियां अंकित की गई हैं, जो लाइट चालू करने पर दमकती भी हैं। विभिन्न उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें सन डायल, एगूमेंटेंड रियलिटी, मल्टीस्टेज राकेट, दशमलव प्रणाली, शून्य का विचार, पृथ्वी व बुध, एंडविन हबल, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच दूरी, राशि नक्षत्र, चंद्रमा की कलाएं, दिन और रात सहित वैदिक विरासत संबंधी जानकारियां शामिल हैं। टेलीस्कोप भी है, ताकि बच्चे अंतरिक्ष में ग्रहों की स्थिित और सौर मंडल में होने वाली गतिविधियों देख सकेंगे।
सीईओ सिद्धार्थ जैन ने बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य कई राज्यों में सरकारी स्कूलों में अंतरिक्ष लैब हैं। एक बार स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तो बच्चों की अधिक संख्या और परिसर में डाइट होने के चलते शिक्षकों की मौजूदगी से उन्हें यहां लैब स्थापित करने का आइडिया दिया। प्रदेश में ऐसी कोई योजना नहीं थी तो जनसहयोग से लैब तैयार कराने की ठानी और कामयाब हुए। सरपंच, ग्रामीणों और शिक्षकों ने योगदान दिया है।
जिला परियोजना समन्वयक प्रकाशचंद्र नायक ने बताया कि लैब में बच्चों को जानकारी देने के लिए डाइट के व्याख्याताओं व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाया गया है। माह में 15 दिन रात में तारे देखे जाते हैं, जिसमें अलग- अलग शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। जिले में अनुसूचित जन जाति के 53 छात्रावास संचालित हैं, जिनमें भ्रमण को लेकर बजट रहता है, वहां से बच्चों को लाया जाएगा। लैब सफल रहती है तो प्रत्येक ब्लाक में एक लैब तैयार कराएंगे और शासन से योजना में शामिल करेंगे।