
CM Helpline नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 पर उज्जैन की 10 हजार 63 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से आधी से ज्यादा कई हफ्ते पुरानी हैं। सर्वाधिक राजस्व, पुलिस, नगर निगम और महिला एवं बाल विकास विभाग की है, बावजूद शिकायतों का समाधान करने के मामले में उज्जैन की स्थिति सीहोर, छिंदवाड़ा के बाद प्रदेश के 55 जिलों में बी ग्रेड के साथ सबसे अच्छी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सीएम हेल्पलाइन के शिकायतकर्ताओं से दूरभाष पर चर्चा किए जाने के बाद ‘नईदुनिया’ ने शिकायतों के आंकड़ों को टटोला तो ये जानकारी सामने आई।
मालूम हो कि सुशासन की स्थापना के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने सुदूर ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण कराने के लिए सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 पर काल कर या वेबसाइट के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा 31 जुलाई 2014 से प्रारंभ कर रखी है। इस सुविधा के माध्यम से कई लोगों ने समस्याओं का हल भी पाया है मगर कई ऐसे भी हैं जिनकी शिकायतों का हल करने में अफसरों ने देरी की या विशेष कारणों से वे हल ही नहीं कर पाए। परिणामस्वरूप शिकायतों का ग्राफ बढ़ता चला गया।
शासन ने शिकायतों के प्रकार और व्यवस्था अनुरूप तय किया था कि अधिकतम सात से 45 दिनों में शिकायतों का निराकरण हो जाएगा। ताजा रिपोर्ट के अनुसार 5237 शिकायतें ऐसी हैं जो कई सप्ताह पुरानी हैं। 4 हजार 826 शिकायतें सात से 15 दिन पुरानी हैं। बात उज्जैन नगर निगम की करें तो पेयजल की 125, साफ-सफाई की 227, भवन निर्माण अनुज्ञा की 69, सीवेज की 76, स्थायी अतिक्रमण की 76, प्रकाश व्यवस्था की 105, निर्माण कार्य की 33, गैर पालतू श्वानों की 46, स्मार्ट सिटी की 30, पार्किंग, पेंशन, उद्यान, राजस्व की जोड़कर कुल 816 शिकायतें लंबित हैं।
सीएम हेल्पलाइन पर महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी 18 शिकायतें लंबित हैं। स्कूल शिक्षा विभाग की 150, उच्च शिक्षा विभाग की 56, तकनीकी शिक्षा विभाग की 71, विक्रम विश्वविद्यालय की 114, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय की 4, वन विभाग की 13 शिकायतें लंबित हैं। शिकायतें होना प्रमाणित करता है कि लोगों का हक मारा जा रहा है, उन्हें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का समय पर लाभ नहीं मिल रहा। उनके साथ नाइंसाफी भी हो रही है। स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब शिकायतों का समाधान समय रहते नहीं होता।
शिकायतों की सूची 137 कार्यालयों की है। इनमें एक भी ऐसा नहीं, जिनमें शिकायत लंबित न हो। सभी शिकायतें लंबित हैं। व्यवस्था में कसावट आए, इसके लिए एक दिन पहले मुख्यमंत्री, अचानक सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की सुनवाई और उनका समाधान करने के लिए उज्जैन में बनाए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पहुंचे थे। उन्होंने दो शिकायतकर्ताओं से रेंडमली बात की थी। दोनों की शिकायतों का त्वरित समाधान करने का आश्वासन दिया। एक शिकायत इंजीनियरिंग कालेज की छात्रा को दो वर्ष से छात्रवृत्ति नहीं मिलने की थी। दूसरी शिकायत बैंक खाता हैक होने से लेन-देन प्रभावित होने और पिता के इलाज के लिए रुपयों का इंतजाम न होने की थी। इस पर भावुक होकर मुख्यमंत्री ने एक लाख रुपये की मदद स्वीकृत की थी।