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नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में दिल्ली के तीन श्रद्धालुओं के साथ भस्म आरती के नाम पर छह हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि प्रोटोकाल के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष के नाम पर दर्शन अनुमति बनवाई गई है। मंदिर प्रशासन मामले की पड़ताल के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा है। शंका के आधार पर करीब आठ लोगों से पूछताछ जारी है। पुख्ता जानकारी मिलने पर संबंधित के विरुद्ध पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
मंदिर प्रशासक संदीप कुमार सोनी ने बताया कि दिल्ली के श्रद्धालुओं से ठगी होने का मामला संज्ञान में आया है। दर्शनार्थियों ने स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से प्रोटोकाल कोटे के तहत भस्म आरती की अनुमति प्राप्त की थी। यह अनुमति उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष के नाम पर हुई है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
दर्शनार्थियों ने जिन लोगों से भस्म आरती अनुमति के लिए संपर्क किया था, उन्होंने अन्य किसी व्यक्ति से संपर्क कर अनुमति बनवाई है। इसलिए हमारा लक्ष्य अंतिम कड़ी तक पहुंचना है। जल्द ही मामले का पटाक्षेप कर लिया जाएगा तथा दोषी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
महाकाल मंदिर में भस्म आरती अनुमति के लिए कोटा सिस्टम लागू है। मंदिर समिति ने विभिन्न विभागों के अधिकारी, सांसद, विधायक, अन्य राजनेता, विभिन्न राजनैतिक दल तथा मंदिर के पुजारी, पुरोहितों को कोटा आवंटित कर रखा है। इन लोगों की अनुशंसा पर किसी भी व्यक्ति को अनुमति जारी कर दी जाती है। मंदिर समिति इस व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं रख पा रही है। मंदिर के आसपास घूमने वाले दलाल के तार वीआइपी स्वीकृति दिलवाने वाले लोगों से जुड़े हैं। इससे यह लोग आसानी से अनुमति प्राप्त कर लेते हैं।
मंदिर समिति को भस्म आरती अनुमति की संपूर्ण व्यवस्था को आनलाइन कर देना चाहिए। वर्तमान में समिति केवल आनलाइन माध्यम से 400 लोगों को अनुमति जारी करती है। जबकि करीब एक हजार लोगों को प्रतिदिन कोटा सिस्टम के तहत अनुमति जारी होती है। श्रद्धालुओं की मांग है कि भस्म आरती व्यवस्था से कोटा सिस्टम पूरी तरह समाप्त होना चाहिए।