
राजेश वर्मा नईदुनिया, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास (30 जुलाई से 7 सितंबर तक) में इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले 9 लाख 58 हजार 747 श्रद्धालु अधिक पहुंचे। वर्ष 2025 में जहां 1 करोड़ 25 लाख श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए थे, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 1 करोड़ 34 लाख 58 हजार 747 हो गई। यानी एक साल में दर्शनार्थियों की संख्या में 7.66 फीसद की वृद्धि हुई।
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन सुविधा और लड्डू प्रसाद की बिक्री से होने वाली आय में भी बड़ा इजाफा हुआ। इस वर्ष शीघ्र दर्शन टिकट से मंदिर समिति को 17 करोड़ 98 लाख 61 हजार 750 रुपये की आय हुई, जबकि पिछले वर्ष यह आय 10 करोड़ 79 लाख रुपये थी।
इसी तरह लड्डू प्रसाद की बिक्री भी 10 करोड़ 13 लाख रुपये से बढ़कर 13 करोड़ 6 लाख 20 हजार 500 रुपये पहुंच गई। इस वर्ष शीघ्र दर्शन टिकट की बिक्री जरूर गत वर्ष की अपेक्षा अच्छी रही है। हालांकि जानकार कहते हैं कि मंदिर समिति को दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार करना चाहिए, खासकर आम भक्तों की दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुगम तथा शीघ्र दर्शन आधारित बनाना चाहिए।
महाकाल मंदिर समिति ने पहली बार नागपंचमी तथा श्रावण-भाद्रपद मास में निकली भगवान महाकाल की छह सवारी देखने आने वाले भक्तों की संख्या भी दर्शाई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार वर्ष 2026 में 53 लाख 95 हजार भक्तों ने भगवान महाकाल की छह सवारी तथा नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन किए।
हालांकि मंदिर के बाहर पांच से सात किलोमीटर लंबे मार्ग पर भक्तों की गणना का आधार क्या रहा, मंदिर प्रशासन ने इसकी जानकारी नहीं दी है। बता दें वर्ष 2025 में मंदिर समिति ने नागपंचमी व सवारी में शामिल होने वाले भक्तों की इस प्रकार पृथक जानकारी नहीं दी थी।