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एमपी में बनेगा देश का अनोखा धार्मिक सर्किट... महाकालेश्वर से लेकर ओंकारेश्वर समेत शामिल होंगे मालवा-निमाड़ के ये 5 बड़े देवस्थान

मध्य प्रदेश के ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और प्रमुख देवस्थानों को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल करने के संकेत के बाद मालवा-निमाड़ में एक नए ध...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 16 Jun 2026 06:45:39 PM (IST)Updated Date: Tue, 16 Jun 2026 06:45:39 PM (IST)
एमपी में बनेगा देश का अनोखा धार्मिक सर्किट... महाकालेश्वर से लेकर ओंकारेश्वर समेत शामिल होंगे मालवा-निमाड़ के ये 5 बड़े देवस्थान
महाकाल, ओंकारेश्वर और बगलामुखी समेत 5 धाम जुड़ेंगे। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. मालवा-निमाड़ में बनेगा देश का अनोखा धार्मिक सर्किट
  2. महाकाल, ओंकारेश्वर और बगलामुखी समेत 5 धाम जुड़ेंगे
  3. धार्मिक केंद्रों तक श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की तैयारी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और प्रमुख देवस्थानों को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल करने के संकेत के बाद मालवा-निमाड़ में एक नए धार्मिक सर्किट बनाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है तो उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, हरसिद्धि शक्तिपीठ, गढ़कालिका मंदिर और आगर-मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी धाम को जोड़ते हुए मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावशाली धार्मिक सर्किट विकसित हो सकता है।

पर्यटन विभाग की पहल और सर्किट की विशेषता

पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने इस पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। इस सर्किट की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें सनातन परंपरा के तीन प्रमुख आयाम- ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और सिद्धपीठ एक ही यात्रा मार्ग में शामिल होंगे। देश के अधिकांश धार्मिक सर्किट किसी एक धार्मिक धारा पर आधारित हैं, जबकि मालवा-निमाड़ का यह सर्किट शिव, शक्ति और तंत्र साधना परंपरा के प्रमुख केंद्रों को जोड़ सकता है।


धार्मिक पर्यटन से अर्थव्यवस्था को लाभ

वर्तमान में लाखों श्रद्धालु अलग-अलग अवसरों पर इन स्थलों तक पहुंचते हैं। यदि इन्हें एकीकृत यात्रा पैकेज और तीर्थदर्शन योजना से जोड़ा जाता है तो श्रद्धालुओं का ठहराव बढ़ेगा और क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की नई अर्थव्यवस्था विकसित होगी। इसका सीधा लाभ होटल उद्योग, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, प्रसाद व्यवसाय और छोटे व्यापारियों को मिलेगा।

इसलिए होगा यह सबसे बड़ा धार्मिक सर्किट

  • मुख्य शक्तिपीठ : हरसिद्धि (उज्जैन)
  • सिद्धपीठ : गढ़कालिका (उज्जैन)
  • देश के प्रमुख तंत्र साधना केंद्रों में शामिल मां बगलामुखी धाम (आगर-मालवा)
  • पांच जिलों को जोड़ने वाला सर्किट
  • पहले से विकसित सड़क और धार्मिक पर्यटन अधोसंरचना

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धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आधार

प्रदेश सरकार पहले ही श्री महाकाल महालोक, ओंकारेश्वर में एकात्म धाम, श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी परियोजनाओं पर काम करवा रही है। ऐसे में तीर्थदर्शन योजना को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने का विचार इन परियोजनाओं को भी नई गति दे सकता है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और ग्रामीण श्रद्धालुओं को कम खर्च में प्रदेश के प्रमुख तीर्थों के दर्शन का अवसर मिलेगा।

महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे दो ज्योतिर्लिंगों के साथ शक्तिपीठों एवं सिद्धपीठों को जोड़ने वाला यह सर्किट अनूठा धार्मिक पर्यटन मॉडल बन सकता है। इससे मालवा-निमाड़ क्षेत्र राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित होगा।- आशीष सिंह, कमिश्नर, उज्जैन संभाग